जालौन (उरई), अजय मिश्रा । 45 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के विरोध में लोकतंत्र सेनानियों ने कालपी विधायक के मुख्य आतिथ्य में स्थानीय एक विद्यालय में सभा आयोजित कर आपातकाल के दिनों को याद किया और इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाया।
लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति के तत्वावधान में लोकतंत्र सेनानियों ने स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर सभागार में बृजेंद्र मयंक की अध्यक्षता एवं समिति के प्रदेश संरक्षक कालपी विधायक नरेंद्र सिंह जादौन के मुख्य आतिथ्य में संपन्न की गई। जिसमें मुख्य अतिथि ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या करने वाले इस दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने देश को हिला कर रख दिया था। कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस की तत्कालीन नेता और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आज ही के दिन लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करते हुए इमरजेंसी लगाई थी, वह लोकतंत्र के लिए काला धब्बा है। रातों-रात सरकार और कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष करने वाले जनसंघ के नेताओं को जेल में डाल दिया गया था और उनकी आवाज को दबाने का काम किया गया था। बृजेंद्र मयंक ने कहा कि आज से ठीक 45 वर्ष पूर्व कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा था। प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी। जनांदोलन का नेतृत्व कर रहे जयप्रकाश नारायण को भी गिरफ्तार किया
गया था। इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी और भैरव सिंह शेखावत को भी नजरबंद कर दिया गया था। कोई भी व्यक्ति अपनी किसी समस्या को लेकर न्यायालय नहीं जा सकता था। इससे पूर्व सभा का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ किया गया। वहीं, हाथों पर काली पट्टी बांधकर लोकतंत्र सेनानियों ने इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाया। सभा का संचालन जिला महामंत्री पूरनलाल प्रजापति ने किया। इस मौके पर निरंजनलाल माहेश्वरी, श्रीनारायण पांडेय, माताप्रसाद स्वर्णकार, शिवराम महाजन, रामेश्वर दयाल निगम, रामचरन राठौर, रमेशचंद्र गुप्त, नरेंद्र त्रिवेदी, अंगद कुमार कुशवाहा, सियाराम आचार्य, रमेशचंद्र गुप्ता, रणवीर सिंह गुर्जर, विजयचंद्र सिंह, सोहनलाल गुप्त, अंशुमान सिंह, मोहन तिवारी आदि मौजूद रहे।
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| लेकतंत्र रक्षक सेनानियों को संबोधित करते विधायक नरेंद्र सिंह। |


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