बांदा, के एस दुबे । किशोरियों व महिलाओं के लिए एनीमिया, खून की कमी, शारीरिक विकास में बाधा बनता है। एनीमिया के प्रति जन जागरूकता फैलाने में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही मुहिम रंग ला रही है। 15 से 49 साल तक की किशोरियों व महिलाओं की सेहत में सुधार दिखने लगा है। साल दर साल एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या में कमी आ रही है। जिले में नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे.4 एनएफएचएस के अनुसार 15 से 49 साल की 54.5 प्रतिशत किशोरियों व महिलाओं में खून की कमी थी। लेकिन एनएफएचएस.5 में 52.2 प्रतिशत ही एनीमिक रह गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि असंतुलित खाना-पान और अनियंत्रित माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से किशोरियों और महिलाओं को एनीमिया की समस्या हो जाती है। इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। साथ ही शरीर का विकास सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। संकोच बस महिलाएं अपनी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं कर पातीं। विभाग द्वारा कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि महिलाओं में अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लेकिन अभी भी लगभग 50 प्रतिशत किशोरियां व महिलाएं एनीमिया से ग्रसित है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
आरसीएच के नोडल अधिकारी ने बताया कि जनपद में एनीमिक मामलों में कमी देखी जा रही है। हर माह होने वाले वीएचएनडी और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में जांच हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चल रहे कार्यक्रमों में आयरन व कैल्शियम बांटने के साथ अपनी सेहत के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। शहर के खाईपार मोहल्ला निवासी 16 वर्षीय पूनम परिवर्तित नाम बताती हैं कि उन्हें माहवारी के दौरान असहनीय दर्द व अत्यधिक रक्तस्राव होता था। शर्म की वजह से घर पर बात नहीं कर पाती थीं। एक सहेली से जिला अस्पताल में साथिया केंद्र के बारे में पता चला। वहां जाकर महिला काउंसलर वंदना तिवारी को अपनी बात खुलकर बताई। हीमोग्लोबिन की जांच कराई। जो कि कम था। डाक्टर ने टैबलेट इत्यादि दिए। अब उनके शरीर में खून की मात्रा पर्याप्त है।
एनीमिया के लक्षण
- - काम करते समय जल्दी थक जाना
- - सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना
- - दिनभर कमजोरी महसूस होना
- - अधिकतर समय सांस लेने में कमजोरी होती है
- - आंखों के सामने अंधेरा छानाए चक्कर आना
- - सीने और सिर में दर्द होना
- - पैरों के तलवों और हथेलियों का ठंडा होना
- - आंखों का पीलापन, एनीमिया दर्शाने का सर्वोत्तम तरीका है


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