नरैनी तहसील मेें आयोजित किया गया विधिक जागरूकता शिविर
बांदा, के एस दुबे । नरैनी तहसील सभागार में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें लोगों को कानूनी जानकारियां दी गईं। अपर जिला जज व सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अध्यक्षता की। अपर जिला जज श्रीपाल सिंह ने कहा कि जिला विधिक स्रवा प्राधिकरण भ्रूण हत्या के संबंध में जनता को जागरूक करता है। इससे संबंधित कानूनी जानकारियां सरल व सहज भाषा में लोगों को उपलब्ध कराना है, ताकि बच्चियों को सुरक्षित रखा जा सके। भ्रूण हत्या रोकने के लिए महिलाओं को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। इससे वह पारिवारिक दबाव के समय इसका विरोध कर सें। उन्होंने बताया कि यह बड़े हर्ष का विषय है कि हमारे जनपद में बच्चियों का लिंगानुपात बढ़ा है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं का का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। परिवार में बच्चियों के बिनिा परिवार संतुलित और सुखी नहीं रह सकता। न्यायिक अधिकारी ग्राम न्यायालय नरैनी अभय कुमार ने
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| शिविर में मंचासीन अपर जिला जज व न्यायिक अधिकारी |
बताया कि चिकित्सीय आधार पर बच्चियों की जगह अज्ञानतावश अपने बच्चों का गर्भपात करा देती हैं जो कि अनुचित व अवैधानिक है। उन्होंनें महिला सषक्तिकरण पर जोर देते हुए बच्चियों की सुरक्षा की बात कही। इसके साथ ही तहसील नरैनी में स्थापित ग्राम न्यायालय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। पराविधिक स्वयंसेवक सुमन शुक्ला ने कहा कि वर्तमान में बालिकाओं की हालत को देखते हुए अब यह जरूरी है कि महिलाएं अपनी बच्चियों को भ्रूण हत्या के प्रति स्वयं भी जागरूक करें, इससे ससुराल के दबाव में आकर वह अपना गर्भपात न कराएं। किसी भी विषम परिस्थिति में सरकार द्वारा संचालित सेवाएं 1090 अथवा 100 नंबर निशुल्क लगाकर फौरन मदद पा सती है। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वन स्टाप सेंटर प्रबंधक रमा साहू ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रम एचईडब्लू के संबंध में तथा महिला ंिहसा से बचाव के संबंध में विस्तार
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| मौजूद लोग |
से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को घरेलू हिंसा से बचाव के लिए महिला हेल्प लाइन नंबर 181 व 1091 पर अपनी शिकायत दर्ज कराकर घरेलू हिंसा से बच सकती हैं। साथ ही उन्होंने वन स्टाप सेंटर द्वारा पीड़ित महिलाओं को प्राप्त अधिकारों व सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं तथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना आदि के संबंध में जानकारी दी। तहसीलदार नरैनी संतोष कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के उन्नीकृष्णनन बनाम आंध्र प्रदेश सरकार वर्ष 1993 के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा मौलिक अधिकार के रूप में प्राप्त होनी चाहिए। इस शिविर में रामराज सहायक चकबंदी अधिकारी, राशिद अहमद डीईओ, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व पराविधिक स्वयंसेवक रोहित कुमार, सत्येंद्र गर्ग के साथ तहसील नरैनी के कर्मचारी आदि मौजूद रहे।



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