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Saturday, June 21, 2025

जेल की दीवारों के भीतर जागा जीवन का प्रकाश, योग बना बंदियों की नयी दिशा

11 वां योग दिवस विशेष 

बंदियों के जीवन में नवचेतना का संचार

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर जब देश भर में योग के जरिए स्वास्थ्य और शांति का संदेश फैलाया जा रहा था, उसी समय चित्रकूट की जिला कारागार रगौली परिसर में एक अभूतपूर्व आयोजन हुआ। यह आयोजन न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का प्रतीक बना, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन परिवर्तन का भी संदेश लेकर आया। दीनदयाल शोध संस्थान से संचालित जन शिक्षण संस्थान चित्रकूट की ओर से, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के सहयोग से, कारागार में महिला व पुरुष बंदियों को योग कराया गया। योग सत्र के माध्यम से बंदियों के जीवन में आशा, ऊर्जा और आत्मचिंतन की नई राह खोली गई। जेल अधीक्षक शशांक पाण्डेय ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कह कि योग न केवल शरीर का विज्ञान है, बल्कि यह आत्मा का उन्नयन और समाज से पुनर्संयोजन का साधन है। वहीं जेलर संतोष वर्मा ने इसे जीवन का सतत अंग

योग दिवस जिला कारागार पर योग करते जेल अधीक्षक 

बताते हुए कहा कि योग एक दिन की नहीं, जीवन भर की साधना है। जन शिक्षण संस्थान के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पतंजलि योगपीठ के प्रशिक्षकों- जानकी शरण निषाद, श्रीमती पद्मा सिंह एवं कुमारी अनन्या सिंह के माध्यम से 7 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर में प्राणायाम, योगासन, सूर्य नमस्कार जैसी प्रक्रियाएं सिखाई गईं। कहा कि योग केवल अभ्यास नहीं, एक जीवनशैली है। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पंचवटी वृक्षों का रोपण। संपूर्ण आयोजन का सफल संयोजन डिप्टी जेलर प्रमोद कन्नौजिया ने किया। इस मौके परं जेल अधीक्षक शशांक पाण्डेय, जेलर संतोष कुमार वर्मा, जेल चिकित्सक डॉ विकास सिंह एवं डॉ मनोज राजपूत, डिप्टी जेलर प्रमोद कन्नौजिया, अखिलेश कुमार पाण्डेय, बृजकिशोरी सहित जन शिक्षण संस्थान के निदेशक अनिल कुमार सिंह मौजूद रहे।


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