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Monday, January 12, 2026

फसल अवेशष प्रबंधन परियोजना के तहत कॉलेज स्तरीय हुआ जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन

कानपुर, प्रदीप शर्मा - चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा  चंद्रभान सिंह मेमोरियल शिक्षण संस्थान झींझक कानपुर देहात में सोमवार को फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। फसल अवशेष प्रबंधन पर कंपटीशन में 250 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने फसल अवशेष प्रबंधन के लाभ, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण की सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के तत्वावधान में सोमवार को फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के द्वारा मोबिलाइजेशन ऑफ कालेज स्टूडेंट जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन चंद्रभान सिंह मेमोरियल शिक्षण संस्थान झींझक कानपुर देहात में किया गया। स्लोगन, चित्रलेखन, निबंध प्रतियोगिता कार्यक्रम के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। इस प्रतियोगिता में ढाई सौ से अधिक छात्र छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रसार वैज्ञानिक डॉ राजेश राय ने छात्रों को बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) एक ऐसी रणनीति है, जो जुताई की आवृत्ति और तीव्रता को कम करने और पिछली फसलों के बचे हुए अवशेषों की मात्रा बढ़ाने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस प्रबंधन पद्धति का लक्ष्य मिट्टी और जल की गुणवत्ता


का संरक्षण करते हुए कई अन्य पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि उच्च पैदावार, ईंधन, बिजली, तथा सिंथेटिक कीटनाशकों और उर्वरकों जैसे महंगे निवेशों के कम उपयोग के कारण अधिकांश स्थितियों में फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाना उचित है। मृदा विशेषज्ञ डॉक्टर खलील खान ने बताया कि फसल और मिट्टी का प्रकार, जलवायु और खेती के तरीके यह सभी इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि फसल अवशेष प्रबंधन पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद है। डॉ खान ने  बताया कि खेत में बची हुई वनस्पति सामग्री कीटों और रोग वाहकों के लिए प्रजनन स्थल, पोषक तत्वों की आपूर्ति और खरपतवारों की वृद्धि के लिए आश्रय का काम कर सकती है। पशुपालन वैज्ञानिक डा. शशीकांत ने छात्र-छात्राओं से कहा कि पशुपालन में फसल अवशेष जैसे भूसा, डंठल बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि यह पशुओं के लिए सस्ता और सुलभ चारा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी में फसल अवशेषों जैसे भूसा, डंठल का महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, कटाव रोकते हैं, नमी बचाते हैं, खरपतवार नियंत्रण करते हैं और जैविक पदार्थ जोड़ते हैं इससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होती है और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ दिनेश कुमार अवस्थी ने की जबकि कार्यक्रम का शसंचालन कुंवर सिंह ने किया।इस अवसर पर कॉलेज संस्थापक  संतोष सिंह गौर, प्रबंधक शशिबाला सिंह गौर,  विमल कुमार, दीपक कुमार, अवनीश कुमार, एस आर एफ शुभम यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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