जिले में ओवरलोड माफिया बेलगाम 0 नंबर प्लेट गायब, खुली प्रशासनिक पोल
हाईवे पर खनिज माफिया का राज
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में रात होते ही सड़कों का मंजर बदल जाता है और एक अलग ही खेल शुरू हो जाता है।। जैसे ही घड़ी दस बजने का इशारा करती है, हाईवे पर तेज रफतार ओवरलोड ट्रकों की कतारें दिखाई देने लगती हैं। मौरंग, गिट्टी और बालू से लदे ये ट्रक न नियम देखते हैं, न कानून। गुरुवार (12 फरवरी) की रात हमारी टीम ने भरतकूप से शिवरामपुर के पास हाईवे पर करीब साढ़े नौ से साढ़े दस बजे तक पड़ताल की। महज एक घंटे में 20 से 25 ओवरलोड ट्रक फर्राटा भरते मिले। मजे की बात यह रही कि अधिकांश वाहनों पर नंबर प्लेट
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| बिना नम्बर प्लेट के भरतकूप हाईवे पर दौडता ट्रक |
नहीं थी। जिन पर थी, उन पर मिट्टी, कालिख और यहां तक कि गोबर पोतकर नंबर छिपा दिए गए थे। कई ट्रकों में तो रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं दिखे। सवाल सीधा है और साफ भी- क्या यह नजारा जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं दिखता? जब आम नागरिक और मीडिया की नजर इन पर पड़ सकती है तो जिम्मेदार विभागों की आंखें आखिर क्यों बंद हैं? अधिकारियों का दावा है कि नियमित चेकिंग होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है। बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के, बिना पहचान के, ऊपर तक खनिज लदे ट्रक
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| बिना नम्बर प्लेट के ओवरलोड ट्रक |
सड़कों पर बेखौफ फिर कैसे और किसके संरक्षण से दौड़ रहे हैं? सूत्रों की मानें तो ओवरलोडिंग का यह खेल किसी छोटे स्तर का नहीं, बल्कि मजबूत सिंडीकेट की सेटिंग से संचालित हो रहा है। जहंा ऊपर से नीचे तब सब को पता है। रात के अंधेरे में यह नाइट गेम चलता है और सुबह होते ही सब कुछ सामान्य दिखने लगता है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये बिना नंबर के ट्रक किसके संरक्षण में जिले की सड़कों पर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं? यदि यही हाल रहा तो नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगे और हाईवे माफिया के हवाले।
खनिज विभाग के जादुई कैमरे, सड़कों पर बेलगाम ओवरलोड ट्रक जिला प्रशासन और खनिज विभाग आए दिन बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते कि जिले में लाखों रुपये खर्च कर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। दावा यह भी है कि इन कैमरों पर 24 घंटे निगरानी रखी जाती है और खनिज विभाग के अधिकारी हर गतिविधि पर
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| बिना नम्बर प्लेट के भागता एक और दूसरा ट्रक |
पैनी नजर बनाए रहते हैं। लेकिन सवाल है कि जब रात के अंधेरे में ओवरलोड और बिना नंबर प्लेट के ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, तो क्या ये ट्रक उन सरकारी कैमरों में दिखाई नहीं देते? या फिर कैमरे सिर्फ कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों तक ही सीमित हैं? यदि कैमरे सचमुच सक्रिय हैं तो फिर इतनी बड़ी संख्या में गुजरते ओवरलोड ट्रक प्रशासन की नजर से कैसे बच जाते हैं? क्या तकनीक फेल है या फिर सिस्टम जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है? चर्चा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ट्रक संचालक और जिम्मेदारों के बीच मिलीभगत का खेल चल रहा हो, जिसके चलते नाइट गेम बेखौफ जारी है?
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