कृषि मंत्री ने तीन दिवसीय किसान मेले का किया उद्घाटन
बांदा, के एस दुबे । कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 2017 में इस विश्वविद्यालय में मात्र 460 विद्यार्थियों और 13 शिक्षक थे। आज यहां छात्र-छात्राओं की संख्या डेढ़ हजार और 120 शिक्षक अध्ययन व अध्यापन और शोध का कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में लगभग दो लाख मेट्रिक टन की वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन में हुई है। मोदी और योगी सरकारों के प्रयासों और योजनाओं के चलते बुंदेलखंड तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के साथ अध्य्यनरत छात्र-छात्राओं से कृषि विश्वविद्यालय में विकसित की जा रहीं तकनीकों को अन्नदाताओं तक पहुंचाने का आह्वान किया। कहा कि जल्द ही प्रशासन विश्वविद्यालय को खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई शुरू करेगी। विश्वविद्यालय को सरसों के बीज़ को अधिक समय तक भंडारण करने को शोध और बुंदेलखंड में जलवायु को देखते हुए स्पीड
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| कार्यक्रम के दौरान मौजूद कृषि मंत्री। |
ब्रीडिंग के माध्यम से नई किस्में विकसित करने पर जोर दिया। कहा कि बाजरा, मसूर और आलसी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। मेला के दौरान कृषि मंत्री ने दलहन आत्मनिर्भरता में किस्मों को विकसित करने में प्रमुख योगदान देने वाले विख्यात कृषि वैज्ञानिक व भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान निदेशक डाॅ. गिरीश प्रसाद दीक्षित को कृषि अनुसंधान गौरव सम्मान से नवाजा। इसके अलावा विश्वविद्यालय के जालौन कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डाॅ.मुस्तफा, वैज्ञानिक डाॅ.मंजुल पांडेय, डाॅ.राजकुमाारी, डाॅ. मारूफ अहमद व डाॅ.विस्टर जोशी समेत छाता (प्रयागराज) कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डाॅ. एमपी सिंह को भी सम्मानित किया। नरैनी विधायक ओममणि वर्मा ने भी केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। इसके पूर्व विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. एसवीएस राजू ने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों और उपलब्धियां बताईं। निदेशक प्रसार डाॅ.एनके बाजपेई ने सभी का स्वागत किया। गौसेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने प्राकृतिक खेती और गौ आधारित खेती पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रासायनिक खेती से होने वाले विभिन्न समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। किसानों से रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।


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