चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में न्याय की चौखट से उठी संवेदनशीलता की दस्तक तब और गूंजदार हो गई, जब जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में गठित निरीक्षण समिति ने 31 मार्च को राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन नन्हीं जिंदगियों के भविष्य की थाह लेने का प्रयास था, जो गलती की धूल से उठकर सुधार की राह तलाश रही हैं। समिति ने बाल अपचारियों से सीधा संवाद कर उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और पुनर्वास व्यवस्थाओं की परतें खोलीं। जहां स्वच्छता और भोजन व्यवस्था संतोषजनक मिली, वहीं शिक्षा और कौशल विकास में सुधार की जरूरत ने व्यवस्था पर
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| हैण्डपम्प के सामने खडे प्यासे बच्चे |
सवाल भी खड़े किए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौट सकें। इसके साथ ही विधिक साक्षरता शिविर आयोजित कर बच्चों को उनके अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी गई। पॉक्सो एक्ट पर जागरूकता ने भी उन्हें कानून की समझ से लैस किया। यह निरीक्षण केवल व्यवस्था की जांच नहीं, बल्कि उम्मीद की एक नई रोशनी साबित हुआ।


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