वायरल रील ने खोली कमासिन-राजापुर की पोल
राजापुर/चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । राजापुर क्षेत्र में कमासिन-राजापुर मार्ग इन दिनों विकास के दावों पर करारा तमाचा बनकर उभर रहा है। यह सड़क अब रास्ता कम, मुसीबत ज्यादा नजर आती है- जहां डामर की जगह गड्ढों ने कब्जा जमा लिया है और सफर किसी सजा से कम नहीं रह गया। हाल ही में स्थानीय निवासी घनश्याम द्विवेदी द्वारा बनाई गई एक वायरल रील ने इस हकीकत को पूरे इलाके के सामने बेनकाब कर दिया है। वीडियो में सड़क का ऐसा खौफनाक चेहरा दिखता है, जहां वाहन चलाना नहीं, बल्कि बचाकर निकालना एक कला बन चुकी है। कीचड़, धंसे हुए हिस्से और उखड़ी परतें इस बात की गवाही दे रही हैं कि मरम्मत सिर्फ कागजों तक सीमित रही। ग्रामीणों का दर्द भी कम नहीं- स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में
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| राजापुर में क्षतिग्रस्त सडक |
देरी जानलेवा साबित हो सकती है और किसान रोजाना इस जर्जर रास्ते से जूझ रहे हैं। बारिश में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब पानी से भरे गड्ढे मौत के जाल में बदल जाते हैं। सवाल अब सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का है- क्योंकि बार-बार शिकायतों के बावजूद न जनप्रतिनिधि जागे, न प्रशासन हरकत में आया। वायरल रील ने जनता की आवाज को बुलंद जरूर किया है, लेकिन क्या यह आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी या फिर यह मुद्दा भी फाइलों की धूल में दब जाएगा?
आंकडो की बाजीगरी का शिकार राजापुर? राजापुर में कभी सोशल मीडिया और चैनलों पर विकास के बड़े-बड़े कसीदे पढ़े जाते थे। दावा किया जाता था कि क्षेत्र ने अभूतपूर्व तरक्की की है, रैंकिंग में स्थान बना लिया है और अब यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। बदहाल सड़कें, अव्यवस्थित व्यवस्थाएं और मूलभूत सुविधाओं की कमी सवाल खड़े कर रही हैं। क्या यही वह विकास है जिसकी तस्वीर दिखाई गई थी? अगर सब कुछ इतना बेहतर है, तो फिर ये अव्यवस्थाएं क्यों? बड़ा सवाल यही है कि इन हालातों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? प्रशासन, जनप्रतिनिधि या फिर सिर्फ कागजी दावे?


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