बीती हुई बातों और नकारात्मकता को भुलाना, मृत्यु डर खत्म करना जरूरी
बांदा, के एस दुबे । जीवन के 60 वर्ष गुजरने के बाद जीवन में सकारात्मक रूप में जीना और भविष्य के जीवन हेतु श्रेष्ठ कर्म कि पूंजी जमा करनी है। बीती हुई बातो कि नकारात्मकता को भुलाना है|उन्हों कहा कि मै आत्मा अजर अमर अविनाशी हु इस स्म्रुर्ती से मृत्यु का डर ख़त्म करना है। उक्त उदगार माउंट आबू राजस्थान से पधारे हुए बीके भगवान भाई ने कहे। वह वृद्धाश्रम में बुजुर्गो के लिए सकारात्मक विचारों द्वारा स्वस्थ और सुखी जीवन विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वयम को अकेला महसूस नही करना बल्कि परमात्मा पिता मेरे साथ है यह याद रखना है। उन्होंने कहा परिवार के साथ मेरा मेरे पिछले जन्मों का हिसाब पूरा हुआ अब परिवार के साथ बहुत प्यार का सम्बन्ध निभाकर तनाव मुक्त रहाना है। भावी जीवन को बहुत अच्छा बनाने की कुछ करने की तीव्र इच्छा है वर्तमान में प्रभु चिंतन करना है। भगवान भाई जी ने कहा सुखी रहने के लिए तीन बातो को याद रखने हेतु बताया कि
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| वृद्धाश्रम में बोलते हुए अतिथि |
किसी को कुछ बोलो नहीं, किसी को तोको नहीं, किसी से उम्मीद नहीं रखो। उन्होंने कहा कि अपने को कभी अपने को रिटायर्ड न समझना। अभी तक का जीवन तो हमारा व्यवस्था में ही गुजर गया, असली आनंद लेने का समय तो अभी आ गया है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष के बाद हमें अपनी श्रेष्ठ कर्म की पूंजी जमा करने हेतु जो टाइम मिला है उसका सफल करना है। जितना बड़ा वृक्ष होता है उसे अपने आंगन में ही रहने दीजिये ,वो फल नहीं दे रहा है लेकिन छाया तो दे रहा है। हमारे बड़े वयोवृद्ध हमें दौलत नहीं देंगे लेकिन संस्कार तो अवश्य ही देंगे |संस्कारो से हमारा संसार अच्छा बनता है। स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र की राजयोग शिक्षिका बी के शालिनी बहन जी ने राजयोग की विधि बताते हुआ कहा कि स्वंम को आत्मा निश्चय कर चाँद, सूर्य, तारांगण से पार रहनेवाले परमशक्ति परमात्मा को याद करना, मन-बुद्धि द्वारा उसे देखना, उनके गुणों का गुणगान करना ही राजयोग हैं । राजयोग के द्वारा हम परमात्मा के मिलन का अनुभव कर सकता हैं। तिंदवारी ब्रह्माकुमारी की प्रभारी बीके साधना बहन जी नें कहा की राजयोग के अभ्यास द्वारा ही हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, नफरत आदि मनोविकारों पर जीत प्राप्त कर जीवन को अनेक सद्गुणों से ओतपोत व भरपूर कर सकते हैं। समाज कल्याण अधिकारी अभिषेक अवस्थी जी ने कहा कि यदि हमारे विचार सकारात्म है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा । उन्होंने बताया कि जीवन को रोगमुक्त,दीर्घायु, शांत व सफल बनाने के लिए हमें सबसे पहले विचारों को सकारात्मक बनाना चाहिए। पूर्व साहयक निर्वाचन अधिकारी रामपाल निषाद ने भी अपना उद्बोधन दिया। संचालक राम किशोर त्रिवेदी जी ने ब्रह्माकुमारी का आभार व्यक्त किया और कहा भविष्य में ऐसे प्रोग्राम जरूर रखे ताकि सभी का मानसिक विकास हो सके। कार्यक्रम में लोक कलाकार रमेश पाल, कृषि अधिकारी छेदीलाल भाई, बीके दिलीप भाई, पत्रकार बीके सुनोंनी बहन भी उपस्थित रहे। अंत में मेडिटेशन भी किया।


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