चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले के विद्याधाम विद्यालय प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा के छठवें दिन भक्ति का ऐसा सागर उमड़ा कि पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष और बधाई गीतों से गूंज उठा। वृंदावन से पधारे मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनाते ही श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा में बताया गया कि आदिपुरुष मनु और शतरूपा की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने त्रेता युग में उनके पुत्र रूप में अवतार लेने का वरदान दिया, जो अयोध्या में राजा दशरथ के
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| कथा में सुनाते व्यासजी |
यहां श्रीराम के रूप में साकार हुआ। जैसे ही रामजन्म का प्रसंग आया, श्रद्धालु नर-नारी खुद को रोक न सके और भक्ति में झूमते हुए नृत्य करने लगे। कार्यक्रम की शुरुआत रूपल बहन द्वारा पूजन-अर्चन से हुई। संत-महंतों, श्रद्धालुओं और दूर-दराज से आए भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।
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