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Wednesday, April 22, 2026

मरौली खण्ड चार और पांच व में जारी है अवैध खनन

नुनू झा और संजीव गुप्ता को नहीं प्रशासन की कार्यवाही का डर

डीएम साहब देखें कि किस प्रकार जल की धारा को रोककर हो रहा अवैध खनन 

बांदा, के एस दुबे । लाल सोने की लूट में मरौली खण्ड 4 और 5 की खदानों में रोजाना नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। इस खदानों से जुड़े कथित खनन माफिया नुनू झा और संजीव गुप्ता की जुगल जोड़ी धमाल मचाये हुए है। बताते चलें कि बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली केन नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर सदर तहसील के मरौली खंड संख्या 4 ओर 5 में खनन का जो खेल चल रहा है, वह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि प्रकृति के साथ एक ऐसा अपराध है जिसकी भरपाई आने वाली पीढ़ियां भी नहीं कर पाएंगी। प्रशासनिक संरक्षण और खनन माफियाओं के गठजोड़ ने नदी को रेत की मंडी में तब्दील कर दिया है।


जबकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और खनन नियमावली के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी के बीच जलधारा से खनन नहीं किया जा सकता और पोकलैंड जैसी भारी मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। लेकिन मरौली में हकीकत इसके उलट है। पोकलैंड मशीनें नदी की मुख्य धारा के भीतर घुसकर बालू निकाल रही हैं। अवैध पुल और रास्तेरू पट्टेदारों ने अपनी सुविधा के लिए नदी का प्राकृतिक बहाव रोककर अवैध खनन किया जाता है स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक गहराई और दायरे में खुदाई कर नदी की तलहटी को खोखला किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन के उजाले से ज्यादा रात के अंधेरे में खौफनाक मंजर होता है। दर्जनों ओवरलोडेड ट्रक और डंपर गांव की सड़कों से गुजरते हैं, जिससे न केवल धूल का गुबार उड़ता है बल्कि सड़कें भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। ओवरलोडिंग का यह खेल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़ा करता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। जल की धारा को रोककर अवैध पुल बनाया गया है जब भी कोई टीम निरीक्षण के लिए आती है, मशीनों को पहले ही हटा दिया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग में भीतर विभीषण  घुसा है जो माफियाओं को सूचना लीक करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसी तरह नदी के बहाव को मोड़ा गया और तलहटी के साथ छेड़छाड़ की गई, तो आगामी मानसून में केन नदी अपना रास्ता बदल सकती है। इससे मरौली और आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का भारी खतरा पैदा हो सकता है। केन नदी महज एक बालू का स्रोत नहीं, बल्कि बांदा की संस्कृति और जीवन का आधार है। यदि समय रहते इन सफेदपोश माफियाओं पर लगाम नहीं कसी गई, तो नदी का कत्ल करने वाले ये लोग बांदा को एक सूखे रेगिस्तान की ओर धकेल देंगे। इन दोनों खदानों से जुड़े कथित खनन माफिया के द्वारा प्रशासन को खुलेआम चुनौती दी जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब से खदान चालू हुई तब से खनिज अधिकारी के द्वारा कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई सूत्रों ने बताया कि खनिज विभाग के अधिकारियों से खदान मालिक के अच्छे संबंध है इसलिए कार्रवाई नहीं होती है।


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