हर घर पोषण हर घर हरियाली की दिशा में ग्रीष्म कालीन सब्जी बीज का किया गया वितरण
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां द्वारा ग्राम नकैला में ग्रीष्मकालीन पोषकीय गृह वाटिका एवं भूमि सुपोषण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 30 किसानों एवं महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान खाद्य प्रसंस्करण वैज्ञानिक डॉ. हेमराज द्विवेदी ने गृह वाटिका के माध्यम से वर्षभर पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमित भूमि एवं संसाधनों में भी हरी सब्जियों एवं पोषक फसलों का उत्पादन कर परिवार के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने सब्जियों के संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन की तकनीकों पर भी प्रकाश डाला। पोषकीय गृह वाटिका (घर के आसपास छोटी सब्जी व फल बाड़ी) आज के समय में परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का एक सरल व प्रभावी माध्यम है जो पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है और
स्वास्थ्य में सुधार, आर्थिक बचत और अतिरिक्त आय, सालभर उपलब्धता, महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण, सीमित जगह में उत्पादन का आधार है। पोषकीय गृह वाटिका न केवल परिवार को स्वस्थ बनाती है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से भी लाभकारी है। यह हर घर पोषण, हर घर हरियाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान पोषण वाटिका किट में भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान बैंगलोर से आई ग्रीष्म कालीन सब्जी बीज का वितरण भी किया गया। मृदा वैज्ञानिक डॉ. अशोक शर्मा ने भूमि की उर्वरता बनाए रखने एवं बढ़ाने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन, जैविक खादों के उपयोग एवं मृदा परीक्षण के महत्व को समझाया। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी के साथ-साथ विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। किसानों एवं महिलाओं ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसे अपने दैनिक कृषि कार्यों में अपनाने की हांमी भरी। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में इस प्रकार के और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम मे दीनदयाल शोध संस्थान के समाज शिल्पी कार्यकर्ता उदय यादव का विशेष सहयोग रहा।


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