बांदा, के एस दुबे । जनपद की नरैनी तहसील अंतर्गत बिल्हरका गांव में केन नदी का सीना चीर रहे अवैध बालू खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। पट्टाधारकों की कथित दबंगई और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे खनन के खिलाफ ग्रामीणों ने अब सीधे मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि बिल्हरका के पास केन नदी में स्वीकृत पट्टे की आड़ में भारी मशीनों से अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पट्टाधारक और उनके गुर्गे दबंगई के बल पर नदी के जलप्रवाह को रोक रहे हैं और निर्धारित गहराई से कहीं अधिक खनन कर रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि भविष्य में जलस्तर गिरने का भी खतरा पैदा हो गया है। ग्राम पंचायत चांदी पाठा के मौजा चांदी पाठा, जमवारा और हरई खदान के बालू ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर पोकलैंड मशीनों से नदी का सीना चीर रहे हैं। अवैध खनन के कारण नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनमें गिरकर ग्रामीणों के पालतू जानवर मर रहे हैं।
ठेकेदारों द्वारा इन मृत जानवरों को गड्ढों में ही दफन कर साक्ष्य मिटाने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे बालू से भरे ओवरलोड ट्रकों को रोकते हैं, तो पुलिस प्रशासन ग्रामीणों पर ही मुकदमा दर्ज करने की धमकी देता है। वहीं, खदान संचालकों और दबंगों द्वारा विरोध करने वाले ग्रामीणों को “नदी में जिंदा दफन करने“ की धमकी दी जा रही है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। खनन के कारण केन नदी की धारा प्रभावित हो रही है और किनारों का कटान हो रहा है। इसके चलते नदी में पानी कम हो गया है, जिससे मवेशियों को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा है। ग्रामीण अपने जानवरों को पानी पिलाने के लिए नदी के बीचों-बीच ले जाने को मजबूर हैं, जहाँ दुर्घटना का खतरा बना रहता है।जिला खनिज अधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी है। शिकायतकर्ताओं में सुमित सिंह, जगपाल सिंह, प्रदुम्न सिंह, रामजी और देशराज सहित ग्राम बिल्हरका के तमाम ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध खनन तत्काल नहीं रोका गया, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।


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