बुंदेली सेना नें अधूरी सड़क बनवाने और पर्यटन विकास की जिलाधिकारी से की मांग
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि - जिस स्थल में पहुंचकर स्वयं प्रभु श्री राम ने सिद्ध बाबा को दर्शन दिए, जहां आज भी हजारों वर्ष पूर्व के भित्ति चित्र मौजूद हैं, जो 84 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा का मार्ग है, वह मुख्यालय का नजदीकी तीर्थ बांकेसिद्ध बदहाल है, बुंदेली सेना नें जिलाधिकारी से बाँकेसिद्ध का पर्यटन विकास कराने की मांग की है l मुख्यालय से लगभग 6 किमी.दूर स्थित यह स्थल हवाई पट्टी के ठीक नीचे स्थित है, कलेक्ट्रेट मार्ग से गणेशबाग-सिद्धपुर होते हुए बांकेसिद्ध पहुंचा जा सकता है l सिद्धपुर से बांकेसिद्ध तक 3 किमी.सड़क तो लोक निर्माण विभाग नें बनाया लेकिन लगभग 3 सौ मीटर मार्ग अधूरा छोड़ दिया है l कई एक बार मुख्यमंत्री पोर्टल में मांग हुई तो विभाग नें बजट का रोना सुनाकर पल्ला झाड़ लिया l
कलेक्ट्रेट मार्ग से बांकेसिद्ध तक चौड़ा और सुगम रास्ता बना दिया गया होता, बांकेसिद्ध की सीढ़ियां नई और रेलिंगदार बना दी गई होतीं, यहां यात्री शेड होते और देवांगना मार्ग से हवाई पट्टी की बाउंड्री किनारे से रास्ता बना दिया गया होता तो शायद यह स्थल पर्यटन का बड़ा हब होता, वर्षभर में हजारों तीर्थयात्री इसी ऊबड़ खाबड़ रास्ते से पंचकोसी परिक्रमा करते हैं, वर्ष में एक बार हजारों साधु-संत इसी मार्ग से चौरासी कोसी परिक्रमा करते हैं बावजूद इसके बांकेसिद्ध उपेक्षित और बदहाल है l यहां हजारों वर्ष पुराने भित्ति चित्रों की भरमार है साथ ही यहां
की गुफाओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचरण हो रहा है l बावजूद इसके ना तो कभी पर्यटन विभाग ने यहां के विकास की योजना बनाई ना ही पुरातत्व विभाग ने यहां के भित्ति चित्रों के संरक्षण का खाका खींचा l बुंदेली सेना नें जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से अधूरी सड़क बनवाने और उपेक्षित और बदहाल बाँकेसिद्ध आश्रम के पर्यटन विकास की मांग की है l



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