इस साल जिले में कुल 54 लाख पौधों का होगा रोपण
वन विभाग उपलब्ध कराएगा अर्जुन, आंवला और जामुन जैसे औषधीय पौधे
भौगोलिक स्थिति के अनुकूल लगेंगे पौधे, आयुष विभाग संभालेगा देखरेख का जिम्मा
बांदा, के एस दुबे । विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पर शुक्रवार को जनपद में हरित क्रांति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी शुरुआत हुई। जिले के आला अधिकारियों ने बदलती जलवायु के बीच पर्यावरण की अहमियत को समझते हुए सांकेतिक रूप से वृक्षारोपण कर महाअभियान का शंखनाद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस वर्ष बरसात के मौसम में बांदा जनपद को पूरी तरह हरा-भरा बनाने के लिए 54 लाख पौधे रोपित करने का महालक्ष्य निर्धारित किया गया है। योगी सरकार का यह अभियान न सिर्फ पर्यावरण को शुद्ध करेगा बल्कि जन-जन की सेहत को भी सुधारेगा क्योंकि इस साल औषधीय पौधों को भी रोपित किया जाएगा।
औषधीय पौधों से महकेगा जनपद, आयुष विभाग की देखरेख में बनेगा 'चरक वन'
इस वर्ष का वृक्षारोपण अभियान पिछले वर्षों की तुलना में बेहद खास और अनूठा है। योगी सरकार के निर्देशों पर इस बार औषधीय पौधों के रोपण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद में एक अभूतपूर्व प्रयोग करते हुए आयुष विभाग द्वारा 'चरक वन' की स्थापना की जा रही है। इस विशेष वन में केवल औषधीय और पारंपरिक चिकित्सा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण पौधे लगाए जाएंगे। इस योजना के तहत वन विभाग और आयुष विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। वन विभाग औषधीय गुणों से भरपूर उत्तम प्रजाति के पौधे उपलब्ध कराएगा जबकि इनके रोपण, सुरक्षा और संपूर्ण देखरेख की जिम्मेदारी आयुष विभाग को सौंपी गई है।
अर्जुन, आंवला और जामुन जैसी प्रजातियों से सजेगा वन
प्रारंभिक चरण में प्रयोग के तौर पर 1 हेक्टेयर भूमि में इस औषधीय 'चरक वन' को विकसित किया जा रहा है। इसमें अर्जुन, आंवला, जामुन, नीम और बहेड़ा जैसे औषधीय तत्वों से युक्त पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पौधे न केवल पर्यावरण को ऑक्सीजन देंगे बल्कि भविष्य में आयुर्वेद और स्थानीय चिकित्सा प्रणालियों के लिए संजीवनी साबित होंगे। इस सफल प्रयोग के बाद आगामी वर्षों में चरक वन का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा।
भौगोलिक स्थिति के अनुकूल होगा पौधों का चयन: डीएफओ
मामले की जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अरविंद कुमार ने बताया कि योगी सरकार के विजन को धरातल पर उतारने के लिए इस बार 'चरक वन' को विशेष रूप से डेवलप करने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी कमान आयुष विभाग को सौंपी गई है। वन विभाग केवल उन्हीं औषधीय पौधों को उपलब्ध करा रहा है जो बुंदेलखण्ड की भौगोलिक स्थिति और यहां की जलवायु के हिसाब से पूरी तरह अनुकूलित हों ताकि पौधों के जीवित रहने की दर शत-प्रतिशत रहे। ऐसा माना जा रहा है कि इस अभियान से बुंदेलखंड की धरती न सिर्फ हरी-भरी होगी बल्कि औषधीय पौधों के हब के रूप में बांदा को एक नई पहचान मिलेगी।


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