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Monday, June 15, 2026

सिर्फ 150 मीटर का टुकड़ा और 64 साल का इंतजार...

बांदा के मवई बुजुर्ग के ग्रामीणों ने अब डीएम से लगाई गुहार

बांदा, के एस दुबे । देश और प्रदेश में विकास की बयार बह रही है, लेकिन बांदा जिला मुख्यालय के ठीक नाक के नीचे एक ऐसा गांव भी है जो पिछले 64 सालों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बांदा तहसील और जिला अंतर्गत आने वाले ग्राम मवई बुजुर्ग के निवासियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। सालों से नारकीय जीवन जी रहे ग्रामीणों ने आखिरकार लामबंद होकर जिलाधिकारी को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा है और अपने मौलिक अधिकारों के लिए न्याय की गुहार लगाई है। जिला मुख्यालय के पास स्थित मवई बुजुर्ग गांव के ग्रामीण आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। सन् 1962 में बसे इस गांव के करीब 62 परिवार आज भी सड़क, नाली और


स्वच्छ वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। परेशान और लाचार ग्रामीणों ने आज जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई और एक लिखित ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द सीसी रोड और नाली निर्माण कराए जाने की मांग की है।

इस प्रभावित हिस्से में रहने वाली अधिकांश आबादी बेहद गरीब है, जिसमें भूमिहीन मजदूर और बेसहारा विधवा महिलाएं शामिल हैं। अपनी सुध लेने वाला कोई न देख, आज इन ग्रामीणों का दर्द छलक उठा। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन वर्षों से उनकी शिकायत पर सिर्फ आश्वासन ही मिला, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मानसून या सामान्य बारिश के मौसम में पूरे गांव की स्थिति बद से बदतर हो जाती है। हर तरफ गंदा पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। गलियां तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे मलेरिया, डायरिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। कीचड़ के कारण छोटे बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है, बुजुर्ग घर में कैद होने को मजबूर हैं और महिलाओं को रोजमर्रा के घरेलू कामकाज निपटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने एक बहुत ही व्यावहारिक मांग रखी है। उन्होंने बताया कि गांव के निवासी रामनरेश पुत्र सदलुवा चमार के घर तक मात्र 150 मीटर की दूरी है। यदि प्रशासन विशेष प्राथमिकता के आधार पर इस 150 मीटर के टुकड़े में सीसी रोड और दोनों तरफ पक्की नाली का निर्माण करा दे, तो गांव का गंदा पानी बाहर निकल जाएगा और ग्रामीणों की आधी से ज्यादा मुसीबत तुरंत खत्म हो जाएगी।सन् 1962 से इस गांव में रह रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे बच्चे कीचड़ में चलने को मजबूर हैं। अगर इस बार भी हमारी मांग पूरी नहीं हुई और प्रशासन ने इस 150 मीटर की सड़क और नाली का निर्माण नहीं कराया, तो हम उग्र आंदोलन और प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।


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