2007 में पद्मश्री स्व. डॉ बी के जैन ने आई बैंक खोल,नेत्रदान का बीज किया रोपित
2009 में स्व डॉ जैन ने पहले अपने ही परिवार से नेत्रदान कि की शुरुआत
दुनिया से अलविदा लेते हुए पद्मश्री स्व डॉ बी के जैन ने भी किया अपनी आंखों का दान
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि - परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी महाराज द्वारा स्थापित विश्व ख्याति प्राप्त श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट में आज विश्व नेत्रदान दिवस मनाया गया। विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर लोगो को नेत्रदान का महत्व बताते हुए जागरूक किया गया,बताया गया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी जाति धर्म का हो ओ नेत्रदान कर सकते है साथ ही नेत्रदान करने करने के लिए कोई उम्र का बन्धन नहीं है।
नेत्रदान के लिए महत्वपूर्ण बाते, कौन नेत्रदान कर सकता है
नेत्रदान लगभग हर व्यक्ति कर सकता है,नेत्रदान मरणोपरांत ही किया जाता है। व्यक्ति के मृत्यु के 6 घंटे के अंदर नेत्रदान किया जा सकता है। चाहे व्यक्ति को चश्मा लग रहा हो, या मधुमेह से पीड़ित हो, अथवा मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुका हो ओ भी नेत्रदान कर सकते है। नेत्रदान की प्रक्रिया में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है। नेत्रदान में आँख का ऊपरी भाग अर्थात पुतली (कार्निया) ही लिया जाता है, जिससे नेत्रदाता के चेहरे में कोई भी विकृति नहीं आती है।
नेत्रदान का महत्व
व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात आँख की पुतली निकालकर,कार्निया जनित अंधत्व से पीड़ित व्यक्तियों की आँखों में प्रत्यारोपित किया जाता है जिससे वह फिर से दुनिया देख सकते है,यह बहुत ही पुनीत और महान कार्य एवं महादान भी है।
पद्मश्री स्व. डॉ बी के जैन ने चित्रकूट में 2007 में नेत्रदान का बीज रोपित किया
पहला नेत्रदान अपने ही परिवार से कराया,और दुनिया को अलविदा कहते हुए अपनी भी आंखों का दान कर गए स्व डॉ जैन सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं ट्रस्टी डॉ इलेश जैन ने विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर बताया कि धर्मनगरी चित्रकूट में सन 2007 में पहला आई बैंक खोलकर पद्मश्री स्व डॉ बी के जैन नेत्रदान का बीज रोपित किया था।उन्होंने बताया कि डॉ जैन ने नेत्रदान पर एक नारा दिया था,"नेत्रदान को बनाएं,अपने परिवार की परम्परा" और इसी नारे को साकार करते हुए उन्होंने पहला नेत्रदान 2009 में अपने ही परिवार से स्व.श्रीमती उज्जम बेन वोरा जी का कराया था।उसके बाद इस नेत्रदान से लोगों ने प्रेरणा ली और नेत्रदान करना प्रारंभ किया। डॉ इलेश जैन ने बताया कि जाते जाते ओ खुद भी अपनी आंखों का दान करके चले गए और दो लोगों की जिंदगी में उजाला कर गए। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 10 हजार लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है,एवं लगभग 9 हजार लोगों का सफल पुतली प्रत्यारोपण हो चुका है। इस मौके पर कार्निया विभाग के प्रमुख नेत्र चिकित्सक डॉ गौतम सिंह परमार ने संकल्प लिया है कि "दिखलाएंगे उनको भी,जिनके जीवन में अंधेरा है,जिनकी आशाओं के आंगन को अंधकार ने घेरा है" डॉ गौतम सिंह परमार ने बताया कि व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात हमारा समाज उसे जला देता है या दफना देता है जिससे आँखें भी नष्ट हो जाती है यदि इस प्रक्रिया से पहले मृत व्यक्ति की आंखों का दान कर दिया जाए तो किन्हीं ऐसे व्यक्तियों का जीवन रोशन कर सकते है जो कार्निया जनित अंधत्व से पीड़ित है, और मृत व्यक्ति की आंखों को जिंदा रखने का काम कर सकते है। इस मौके पर निदेशक डॉ इलेश जैन एवं डॉ गौतम सिंह परमार ने उन सभी दिवंगत अमर नेत्रदाताओं को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारजनों के प्रति भी बहुत बहुत आभार प्रगट किया। इस मौके पर सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के सभी नेत्र चिकित्सक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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