बांदा, के एस दुबे । देश के सबसे गर्म जिलों में शुमार बाँदा में इन दिनों पारा चढ़ने के साथ ही पेयजल का संकट भी विकराल रूप धारण कर चुका है। जिले में लगातार गिरते भूगर्भ जल स्तर और गहराते पानी के संकट को देखते हुए जनता दल यूनाइटेड ने गहरा रोष व्यक्त किया है। जेडीयू के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रवींद्र नाथ गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की है।जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में जेडीयू नेता रवींद्र नाथ गुप्ता ने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हर साल लाखों लीटर वर्षा जल बिना संचयन के बर्बाद हो जाता है, क्योंकि प्रशासन के पास वर्षा जल संचयन को लेकर कोई प्रभावी योजना नहीं है।उन्होंने बाँदा विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर के व्यावसायिक भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सिर्फ कागजों पर चल रहा है। हद
तो यह है कि खुद अधिकांश सरकारी व अर्ध-सरकारी भवनों, स्कूलों, अस्पतालों और पुलिस थानों में भी यह सिस्टम स्थापित नहीं है, जो आम जनता के बीच एक बेहद गलत उदाहरण पेश कर रहा है।ज्ञापन में जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिना किसी पंजीकरण और रोक-टोक के चल रहे अवैध कमर्शियल बोरिंग, आरओ प्लांट और व्हीकल सर्विस स्टेशनों पर गहरी चिंता जताई गई है। जेडीयू नेता ने कहा कि ये केंद्र बिना किसी जल रीसाइक्लिंग व्यवस्था के दिन-रात लाखों लीटर भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। इनसे न तो कोई शुल्क लिया जा रहा है और न ही कोई नियम लागू हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि यह लापरवाही श्उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2019श् के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। जेडीयू प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं, जो इस प्रकार हैं। नए निजी और व्यावसायिक भवनों को तब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट न दिया जाए, जब तक वहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू न हो।सरकारी भवनों में अनिवार्यतारू सभी सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, चिकित्सालयों और थानों में तत्काल प्रभाव से वॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य रूप से चालू कराई जाए। बिना पंजीकरण चल रहे व्यावसायिक जल दोहन केंद्रों, अवैध आरओ प्लांट और वाशिंग सेंटरों को चिन्हित कर बंद किया जाए और भारी जुर्माना वसूला जाए। कमर्शियल बोरिंग के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो और पानी के बेतहाशा इस्तेमाल पर एक निश्चित शुल्क सीमा तय की जाए। पानी बचाने और जल संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए वार्ड और ग्राम स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। जेडीयू नेताओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते भूगर्भ जल संरक्षण और अवैध दोहन को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में बाँदा का जल संकट पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगा और जनता बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगी। इस दौरान ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में जेडीयू के जिला उपाध्यक्ष राजा राम राही, जिला महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष पिंकी प्रजापति और विकलांग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राम प्रजापति समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे।


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