कानपुर, प्रदीप शर्मा - अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय तथा नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’’योग पखवाड़े’’ का उद्घाटन मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सेनानायक तात्या टोपे सभागार में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाली जीवन-पद्धति है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत लगभग 17 हजार विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में समाज की सकारात्मक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी, गायत्री परिवार, ईशा फाउंडेशन, इस्कान सहित विभिन्न संगठनों से विद्यार्थियों को जीवन-मूल्यों, नैतिकता एवं आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का आह्वान किया।
कुलपति ने विश्वविद्यालय में संचालित ’’बी.एससी. योग, एम.एससी. योग, पी.जी. डिप्लोमा इन योग तथा एम.ए. योग’’ पाठ्यक्रमों के बारे में बताते हुए कहा कि ये केवल शैक्षणिक डिग्रियाँ नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं आर्थिक विकास के प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति की अंतर्निहित ऊर्जा को जागृत कर उसकी कार्यक्षमता, एकाग्रता एवं जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कप्तान सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी, कानपुर नगर एवं देहात ने कहा कि योगिक जीवनशैली तथा आयुर्वेद आधारित आहार परामर्श स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोग निवारण दोनों क्षेत्रों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की थीम योगा फॉर हेल्दी एजिंग के बारे में बताते हुए कहा कि वृद्धावस्था को स्वस्थ, सक्रिय एवं सम्मानजनक बनाने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि परम्परा में योग को दीर्घायु, रोगमुक्ति एवं जीवन-संतुलन का आधार माना गया है। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान भी यह सिद्ध कर रहे हैं कि नियमित योगाभ्यास वृद्धावस्था के प्रभावों को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक है।
योग पखवाड़ा समन्वयक डॉ. रामकिशोर ने योग पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में संचालित योग पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में है तथा अभ्यर्थियों को 'पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर प्रवेश प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं आमजन से योग पखवाड़े के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
नीमा वूमेन फोरम की सचिव डॉ. वंदना पाठक ने योग एवं आयुर्वेदिक आहार सिद्धांतों के बारे में बताते हुए कहा कि भोजन ग्रहण करने से पूर्व सकारात्मक भाव, प्रार्थना एवं मंत्रोच्चारण का मानव स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने एक विशेष उपकरण के माध्यम से इसका प्रदर्शन भी किया तथा बताया कि सकारात्मक भावनाएँ भोजन की गुणवत्ता एवं उसके सूक्ष्म प्रभावों को प्रभावित करती हैं, जिससे मन एवं बुद्धि दोनों स्वस्थ रहते हैं।
कार्यक्रम में नीमा संस्थापक डॉ. विजय दुबे, डॉ. निरंकार गोयल, डॉ. नीरज दुबे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन योग प्रशिक्षिका सोनाली धनवानी एवं डॉ. राघवेंद्र चतुर्वेदी द्वारा किया गया। योग पखवाड़ें के उद्घाटन समारोह बाद ईशा फाउंडेशन की ओर से लक्ष्मी एवं उनकी टीम द्वारा ध्यान की कार्यशाला आयोजित की गयी। इस अवसर पर डॉ. ए.के. मिश्रा, डॉ. रचित तिवारी, प्रतिमा गुप्ता, डॉ. श्रवण कुमार यादव, डॉ. आशीष कटियार, डॉ. श्याम मिश्रा, डॉ. पंकज जैन, डॉ दिवाकर अवस्थी तथा गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर के व्यवस्थापक गणेश शंकर शुक्ला, ब्रह्मकुमारी से श्रीप्रकाश, इस्कान से अंकुर सहित अनेक अतिथि, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में योग के छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे।


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