वृक्ष आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षित धरोहर: डीएम
बांदा, के एस दुबे । जनपद को हरित, स्वच्छ और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक संपन्न हुई। जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में कड़े रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने ऊर्जा विभाग के बैठक में अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताई और तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अमित आसेरी ने कहा कि वृक्ष केवल पौधे नहीं हैं, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण अभियान को केवल कागजी लक्ष्यपूर्ति तक सीमित न रखकर, इसे पर्यावरण के
भविष्य से जुड़े एक बड़े मिशन के रूप में संचालित किया जाए। लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्यों के दौरान जो भी वृक्ष काटे गए हैं, उनके स्थान पर अनिवार्य रूप से प्रतिपूरक वृक्षारोपण सुनिश्चित किया जाए। सड़कों के किनारे हटेंगी झाड़ियां, बनेगा ग्रीन कॉरिडोररू नगर एवं ग्रामीण संपर्क मार्गों के किनारे उगी झाड़ियों, बबूल एवं विलायती बबूल को हटाकर वहां व्यवस्थित तरीके से पुष्पीय, फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाएंगे। इसके तहत सीमौनी धाम मार्ग को विशेष हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यावरण को जन-आंदोलन बनाने के लिए जिले में जल्द ही ‘‘हर परिवार-एक फलदार पौधा’’ अभियान चलाया जाएगा, जिससे हर आम नागरिक को इस मुहिम से जोड़ा जा सके। जनपद के सभी उचित दर विक्रेताओं की दुकानों, जल जीवन मिशन के कार्यक्षेत्रों, नहरों के किनारों , गौ आश्रय स्थलों और पॉलिटेक्निक परिसरों में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाएगा। खनन पट्टाधारकों को उनके पर्यावरणीय दायित्वों के तहत अनिवार्य रूप से पौधारोपण करने को कहा गया है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कॉरपोरेट एजेंसियों और बड़े संस्थानों के सहयोग से ग्रीन पैच विकसित किए जाएंगे।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि ग्राम्य विकास विभाग द्वारा अब तक लगभग 76 प्रतिशत गड्ढा खोदाई का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने शेष कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने और सभी गड्ढों की जियो-टैगिंग के साथ फोटो पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पौधारोपण की असली सफलता इस बात पर निर्भर है कि कितने पौधे जीवित रहकर वृक्ष बनते हैं। इसके लिए वर्ष 2025 में किए गए वृक्षारोपण का विभागवार सत्यापन कराया जाएगा। साथ ही, वर्ष 2026 के प्रत्येक माह में पौधों के संरक्षण और उनकी जीवितता की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडे, अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र, प्रभागीय वनाधिकारी , परियोजना निदेशक डीआरडीए सहित सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


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