कानपुर, प्रदीप शर्मा - छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय सीएसजेएमयू कानपुर ने जर्मनी की प्रतिष्ठित द रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी नॉलेज फाउंडेशन (केएफआरयू) के साथ एक समझौता ज्ञापन एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं । इस एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान मिलकर एक 5-वर्षीय इंटरनेशनल इंटीग्रेटेड बैचलर एंड मास्टर्स प्रोग्राम शुरू करने जा रहे हैं, जो भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक स्तर पर करियर बनाने के द्वार खोलेगा । इस समझौते पत्र पर सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी नॉलेज फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ मिस्टर डैनियल गीगिस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और तकनीकी संकाय के विभिन्न इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षक, शोधकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और सभी ने इस अंतरराष्ट्रीय समन्वय को विश्वविद्यालय के
इतिहास में एक मील का पत्थर बताया। यह पहला अवसर है जब विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर इस तरह के "पाठ्यक्रम एक्सचेंज और हाइब्रिड क्रेडिट ट्रांसफर कांसेप्ट" की शुरुआत की है । यह न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के लिए एक युगांतकारी कदम है, जहां स्थानीय मेधा को सीधे यूरोप के सबसे बड़े औद्योगिक हब से जोड़कर शिक्षा की सीमाओं को हमेशा के लिए बदल दिया गया है।इस अवसर पर कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यह समझौता हमारे छात्रों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिससे अब कानपुर और उत्तर प्रदेश के छात्र बेहद कम खर्च में विश्वस्तरीय जर्मन शिक्षा हासिल कर सकेंगे और पोर्श जैसी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में अपना करियर शुरू कर सकेंगे ।
वहीं यूआईईटी के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि यूआईईटी हमेशा से ही तकनीकी शिक्षा में नवाचार का केंद्र रहा है और इस इंटीग्रेटेड प्रोग्राम के माध्यम से हमारे इंजीनियरिंग छात्रों को पहले दिन से ही वैश्विक स्तर का एक्सपोज़र मिलेगा, जहां संस्थान में मिलने वाला 3 साल का कड़ा प्रशिक्षण और जर्मनी की एडवांस्ड लैब में बिताए जाने वाले 2 साल इन्हें ग्लोबल लीडर बनाएंगे। डीन एकेडमिक्स प्रो. मित्रा ने पाठ्यक्रम की संरचना के बारे में बताते हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम का सिलेबस दोनों विश्वविद्यालयों ने मिलकर बेहद बारीकी से तैयार किया है , जिसमें हमारा मुख्य फोकस छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और कॉर्पोरेट अनुभव देना है; 20% जर्मन कूरिकुलम की इन-हाउस डिलीवरी और अनिवार्य जर्मन भाषा प्रशिक्षण छात्रों को यूरोपियन मार्केट के लिए पूरी तरह अनुकूल बना देगा ।
इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी और आकर्षक खासियत छात्रों को मिलने वाला 'अर्न व्हाईल यू लर्न' का मौका है । इस वैश्विक प्रोग्राम के लिए प्रति कोर्स न्यूनतम 30 और अधिकतम 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। यह पूरा प्रोग्राम शैक्षणिक सत्र 2026 से प्रभावी रूप से शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए प्रवेश परीक्षा और चयन प्रक्रिया सीएसजेएमयू द्वारा रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित की जाएगी।
'3+1+1' का अनोखा एजुकेशन मॉडल: भारत में तैयारी, जर्मनी में मास्टर्स
इस पाठ्यक्रम को 3+1+1 मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है , जिसके प्रथम चरण के अंतर्गत छात्र पहले 3 साल सीएसजेएमयू यूआईईटी में रहकर अपनी बी.टेक की पढ़ाई करेंगे । इस दौरान पाठ्यक्रम का 20% हिस्सा जर्मन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों द्वारा डिजिटली और हाइब्रिड मोड में पढ़ाया जाएगा, ताकि छात्र जर्मन इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुकूल तैयार हो सकें । साथ ही छात्रों को भारत में प्रवास के दौरान ही कैंपस में अनिवार्य रूप से जर्मन भाषा (A1 से B1 लेवल) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सफलता पूर्वक 3 साल पूरे करने और क्रेडिट अर्जित करने के बाद छात्र अगले 2 साल की मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए जर्मनी की रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी जाएंगे। यह प्रोग्राम मुख्य रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों में संचालित होगा, जिसमें पहला 'प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' है, जिसके अंतर्गत छात्रों को कंप्यूटर साइंस में बी.टेक और जर्मनी से एम.एस.सी. की डिग्री मिलेगी । दूसरा क्षेत्र 'डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट' है, जिसके तहत ईसीई, मैकेनिकल और ईईई (ECE, Mech, EEE) के छात्रों को बी.टेक और जर्मनी से मास्टर्स की डिग्री दी जाएगी।


No comments:
Post a Comment