पीड़िता ने लेखपाल और प्रधान पति पर लगाए गंभीर आरोप
बांदा, के एस दुबे । उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अतर्रा तहसील के अंतर्गत जमरेही गांव से एक बेहद दर्दनाक और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ की रहने वाली एक पीड़ित महिला सेवापति पत्नी दादूराम ने जिलाधिकारी बांदा को शिकायती पत्र सौंपकर ग्राम प्रधान पति, स्थानीय लेखपाल और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि बिना किसी पूर्व नोटिस के बुलडोजर चलाकर उसकी 20 साल पुरानी झोपड़ी और आजीविका का एकमात्र साधन को ध्वस्त कर दिया गया। विरोध करने पर पीड़िता और उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई व जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया गया।शिकायती पत्र के अनुसार, पीड़िता सेवापति गाटा संख्या-938 की दो बिस्वा भूमि पर छप्पर बनाकर रह रही थी और वहीं एक लोहे के डिब्बे में पान,
गुटका व ठंडा पानी बेचकर अपने बीमार पति और 5 बच्चों का पेट पाल रही थी।पीड़िता का आरोप है कि उसने सरकारी आवास के लिए जब ग्राम प्रधान और सचिव से गुहार लगाई, तो उनसे 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। गरीब होने के कारण रुपये न दे पाने पर पीड़िता ने बीती 25 फरवरी 2026 को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि इसके बाद खुन्नस खाकर प्रधान सचिव ने धमकी दी थी कि ष्लिस्ट में नाम आ गया है पर देखते हैं कौन आवास देता है, अब तुम्हें इस जगह से भी बुलडोजर से तुड़वाकर ही दम लेंगे। शिकायत के मुताबिक, 19 जून 2026 की दोपहर करीब दो बजे अचानक ग्राम प्रधान के पति सुभीत यादव, हल्का लेखपाल , चौकी इंचार्ज पप्पू पुत्र छेदिया और खुरहण्ड पुलिस चौकी की महिला पुलिस सहित चार पुलिसकर्मी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच गए। पीड़िता का आरोप है कि बिना कोई नोटिस दिए या समय दिए उनके छप्पर, लोहे की दुकान, कूलर, फ्रिज व पूरी गृहस्थी को बुलडोजर से तहस-नहस कर दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया, तो प्रधान पति और लेखपाल ने जातिसूचक व अभद्र गालियां दीं। इस दौरान पीड़िता की बेटी पूजा के साथ भी मारपीट की गई, जिससे उसकी आंख में गंभीर चोट आई है। इस अचानक हुई कार्रवाई से पीड़ित परिवार पूरी तरह सड़क पर आ गया है। महिला अपने 12 साल, 10 साल, 6 साल, 4 साल और महज 7 महीने के सबसे छोटे बच्चे सहित कुल पांच बच्चों को लेकर इस भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने दोबारा शिकायत करने पर और बुरा अंजाम भुगतने की धमकी भी दी है। बेघर हो चुकी पीड़िता सेवापति ने जिलाधिकारी बांदा से न्याय की गुहार लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को रहने के लिए तुरंत सरकारी आवास व सुरक्षा दिलाने की मांग की है।


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