बांदा, के एस दुबे । पिछले कई दिनों से आसमान से बरस रही आग और भीषण उमस से बेहाल बांदा जनपद वासियों को आज सुबह कुदरत ने बड़ी राहत दी। मंगलवार सुबह से ही आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने मानों तपती धरती की प्यास बुझा दी। मौसम की इस पहली जोरदार और झमाझम बारिश के बाद जहां तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं पूरा बुंदेलखंड मौसम के इस सुहाने बदले मिजाज से चहक उठा है। यह बारिश बांदा के अन्नदाताओं (किसानों) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से सूखे और तपते खेतों को देखकर निराश हो रहे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। सुबह से रुक-रुक कर हो रही इस तेज बारिश ने खरीफ की फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। झमाझम फुहारों के बीच ग्रामीण अंचलों में
किसान बेहद खुश नजर आ रहे हैं और अब खेतों की जुताई व बुवाई के कामों में तेजी आने की उम्मीद है। भीषण गर्मी के कारण जंगलों और बंजर जमीनों पर घास पूरी तरह सूख चुकी थी, जिससे पशु पक्षी और मवेशी पानी व चारे के लिए तड़प रहे थे। आज हुई इस जोरदार बारिश के बाद बंजर हो चुकी जमीनों और पहाड़ों पर फिर से हरियाली लौटने की प्रबल संभावना जाग गई है। सुबह से भीग रहे मवेशियों और चहचहाते पक्षियों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बारिश ने बेजुबानों को कितनी बड़ी राहत दी है।
शहर और ग्रामीण इलाकों के जलसंकट को दूर करने की दिशा में भी यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि इसी तरह मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो बुंदेलखंड की जीवनदायिनी केन नदी का जलस्तर सुधर जाएगा और जिले के सूखे पड़े पोखर, तालाब व बावलियां फिर से जलमग्न हो जाएंगी। लंबे समय के बाद बांदा को उमस और तपती धूप से निजात मिली है। हवा में ठंडक घुलने से आम जनजीवन तो सुधरा ही है, साथ ही हमारी केन नदी और जलस्रोतों को भी नया जीवन मिलेगा। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दो-तीन दिनों तक क्षेत्र में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और रुक-रुक कर भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस पहली बारिश ने बांदा को हरित और समृद्ध बनाने की उम्मीदों को नए पंख दे दिए हैं।


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