कानपुर, प्रदीप शर्मा - छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ द्वारा गुरुवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में "लीगल रिसर्च इन द एज ऑफ एआई : एथिक्स, इनोवेशन एंड एकेडमिक पब्लिशिंग" विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) मोना पुरोहित मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग की निदेशिका डॉ. स्मृति रॉय ने की । कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बदलते स्वरूप, उसके नैतिक एवं उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग तथा गुणवत्तापूर्ण विधिक शोध एवं अकादमिक प्रकाशन के प्रति जागरूक करना रहा।
अपने व्याख्यान में प्रो. (डॉ.) मोना पुरोहित ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विधिक मान्यता एवं विधिक व्यक्तित्व से जुड़े मौजूद समकालीन प्रश्नों पर चर्चा की। उन्होंने विभिन्न समसामयिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को शोध कार्य में एआई के प्रभावी एवं नैतिक उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की विश्लेषणात्मक क्षमता और मौलिक चिंतन का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक साधन है। उन्होंने शोध नैतिकता, साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) तथा शोध प्रकाशन के मानकों पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने शोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अकादमिक प्रकाशन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. विष्णुपति त्रिपाठी ने किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव सहायक आचार्य ऋषि श्रीवास्तव ने दिया।


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