महंगाई, भ्रष्टाचार, नौकरशाही, शिक्षा, पेट्रोल और पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बांदा, के एस दुबे । वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश दीक्षित ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार का विकास केवल नाम बदलने और चौक-चौराहों पर मूर्तियां स्थापित करने तक सीमित रह गया है। उन्होंने कहा कि आम जनता आज महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बदहाल शिक्षा व्यवस्था से जूझ रही है, जबकि सरकार मूल जनसरोकारों से ध्यान हटाने का काम कर रही है। राजेश दीक्षित ने कहा कि चौक-चौराहों पर मूर्तियां स्थापित करने में करोड़ों रुपये का सरकारी धन खर्च किया जाता है। इसके बाद
उनके लोकार्पण एवं फीता काटने के कार्यक्रमों में भी भारी-भरकम सरकारी खर्च, प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर जनता का पैसा खर्च होता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति "नौ की लकड़ी, नब्बे खर्चा" वाली कहावत को चरितार्थ करती है, जबकि यही धन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत पहले लगभग 400 रुपये थी, वह आज 1,000 रुपये से अधिक में मिल रहा है। उनका आरोप है कि सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण करने के बजाय जनता को बढ़ती कीमतों के भरोसे छोड़ दिया है, जिससे आम परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
राजेश दीक्षित ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और नौकरशाही चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। आम जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक दर-दर भटकने को मजबूर है, लेकिन उसे समय पर न्याय और राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें और अधिक परेशान कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में महंगाई एवं भ्रष्टाचार चरम पर है। प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि "न पढ़ेगा इंडिया, न बढ़ेगा इंडिया" की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राजेश दीक्षित ने आरोप लगाया कि जिन योजनाओं के नाम के साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री शब्द जुड़े हैं, उनमें सबसे अधिक भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की इस योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उनका दावा था कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं, लेकिन सरकार इस पूरे मामले पर मौन है। उन्होंने कहा कि जो सरकार कल तक इस योजना को अपनी उपलब्धि बताती थी, वही आज जवाब देने से बच रही है।
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटों की निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आम उपभोक्ताओं को सीधा नुकसान हो रहा है। वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है और आम जनता की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
राजेश दीक्षित ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में स्वतंत्र पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को चौक-चौराहों की राजनीति छोड़कर महंगाई, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, किसानों, युवाओं और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। जनता अब विकास के दावों और जमीनी हकीकत का अंतर समझ चुकी है और आने वाले समय में इन्हीं मुद्दों पर अपना निर्णय देगी।


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