भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं (लौकिक और व्यावहारिक विद्याएं) में दक्ष थे। श्री कृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में रहकर मात्र 64 दिनों में 64 कलाओं (जैसे संगीत, नृत्य, चित्रकला, शिल्प, और शास्त्र ज्ञान) और 14 विद्याओं का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया था। वे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे ओर द्वंद्व युद्ध में भी माहिर थे। इसके अलावा उनके पास कई अस्त्र और शस्त्र थे। उनके धनुष का नाम सारंग था। उनके खड्ग का नाम नंदक गदा का नाम कौमौदकी और शंख का नाम पांचजञ्य था, जो गुलाबी रंग का था। श्रीकृष्ण के पास जो रथ था उसका नाम जैत्र दूसरे का नाम
गरुढ़ध्वज था। भगवान श्री कृष्ण ने पूतना, शकटासुर, नरकासुर, कंस, जरासंध, शिशुपाल, पौड्रक आदि असुरों का वध किया था कालिया नाग बाणासुर को युद्ध में हराया था. भगवान श्री कृष्ण आंतरिक व आध्यात्मिक रूप से 16 कलाओं में पूर्ण अवतार थे और व्यावहारिक तथा सांसारिक ज्ञान के रूप में वे 64 कलाओं के भी ज्ञाता थे, श्री कृष्ण ने बचपन से आलौकिक लीलायें दिखाकर सबको चकित कर दिया।
श्री कृष्ण सोलह कला के पूर्ण अवतार माने गये हैं यह 16 कलाएं (दिव्य गुण और पूर्णता) है-
1. श्री धन संपदा
2. भू अचल संपत्ति
3. कीर्ति यश सिद्धि
4. इला-वाणी की सम्मोहकता
5. लीला आनन्द उत्सव
6. कांति सौदन्र्य और आभा
7. विघा मेघा बुद्धि
8. विमला पारदर्शिता
9. प्ररेणा और नियोजन
10. ज्ञान नीर और विवेक
11. क्रिया कर्मण्यता
12. योग चित्तलय
13. प्रहवि- अत्यंतिक विनय
14. सत्य यथार्थ
15. इसना आधिपत्य
16. अनुग्रह उपकार
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ।


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