चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : मऊ-मानिकपुर क्षेत्र में जनचौपालों के बीच गाहुर के ग्रामीणों ने गांव में कराए गए विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चौपालों में समस्याएं सुनने के साथ पिछले वर्षों में कराए गए कार्यों की उपयोगिता और उनका वास्तविक लाभ भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। युवा समाजसेवी हरिशंकर शुक्ला ने बताया कि बरगढ़-गाहुर मार्ग की बदहाली ग्रामीणों की प्रमुख समस्याओं में शामिल है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग को लेकर वर्ष 2026 में आंदोलन भी किया गया था। बारिश के दौरान जलभराव और आवागमन की परेशानी बनी रहने की बात कही गई है। गांव की गलियों में पक्की सड़क और सीसी मार्गों के साथ नाली निर्माण की भी मांग उठाई गई है। गाहुर में बने बारात घर को लेकर
ग्रामीणों ने निर्माण पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि उसके स्थान और पहुंच को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मुख्य आबादी से दूर और घुमावदार रास्ते पर होने के कारण सभी लोगों के लिए इसका उपयोग सहज नहीं है। ग्रामीणों ने स्थान चयन के मानकों और इसकी उपयोगिता की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा अनियमित बिजली आपूर्ति, ट्रिपिंग और मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क की कमी से ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल और दूरस्थ पुरवों तक योजनाओं की पहुंच को लेकर भी ग्रामीणों ने विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों की सफलता का आकलन उनके वास्तविक उपयोग और लाभ से होना चाहिए।


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