चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : रामायण मेला परिसर सीतापुर में गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां की ओर से जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से पोषित कृषि ज्ञान दूत योजना एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कर्वी ब्लॉक के 168 राजस्व गांवों से चयनित कृषि ज्ञान दूतों ने प्रतिभाग किया। किसानों को प्राकृतिक और गौ आधारित खेती के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल ने कहा कि कृषि ज्ञान दूत सरकार और किसानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने गांव-गांव किसानों को प्राकृतिक और गौ आधारित खेती के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। सीडीओ ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। शासन की सहभागिता योजना के तहत देशी गाय पालन पर अनुदान की जानकारी भी दी। कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने रबी फसलों की
उन्नत तकनीक बताई। उन्होंने गेहूं की बुवाई 10 से 25 नवंबर के बीच करने, सरसों की बुवाई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े तक पूरी करने तथा चने में राइजोबियम कल्चर के प्रयोग की सलाह दी। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया। उप निदेशक कृषि जेएल गुप्ता ने पीएम किसान, फसल बीमा, बीज ग्राम, कृषि यंत्रों पर अनुदान और सोलर पंप जैसी योजनाओं की जानकारी दी। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक रतन कुमार ने किसान क्रेडिट कार्ड और एफपीओ गठन के लिए किसानों को समूह बनाने की सलाह दी। परियोजना प्रभारी उत्तम कुमार त्रिपाठी ने किसानों को स्वयं बीज तैयार करने और जरूरत के अनुसार कृषि रसायनों के प्रयोग की बात कही। संचालन डॉ. सतीश कुमार पाठक ने किया। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के वरिष्ठ कार्यकर्ता अशोक पाण्डेय, राजेन्द्र सिंह, अंकुर त्रिपाठी, सुरेश यादव, अभय कुमार शुक्ला, नरेन्द्र कुमार आदि मौजूद रहे।


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