धाता, फतेहपुर, मो शमशाद । कस्बे में गुरूवा की रात महिलाओं के लिए आयोजित उत्सव-ए-डांडिया में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और नारी शक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। पारंपरिक परिधानों एवं आकर्षक श्रृंगार में सजी महिलाओं ने गरबा और डांडिया की थाप पर उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पूरे वातावरण को उमंग और उल्लास से भर दिया। मनमोहक सजावट व मधुर संगीत के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के प्रति श्रद्धा, पारंपरिक संस्कारों के प्रति सम्मान और महिलाओं की एकजुटता का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्षता सीमा केशरवानी, शिखा केशरवानी, दीपा केशरवानी व नीतू केशरवानी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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| उत्सव-ए-डांडिया में भाग लेतीं महिलाएं। |
अध्यक्षा सीमा केशरवानी ने कहा कि उत्सव-ए-डांडिया केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और नारी शक्ति की एकजुटता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं शिखा केशरवानी ने कहा कि धाता की महिलाओं ने इस आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी आस्था, उत्साह और समर्पण का सुंदर परिचय दिया है। हमारी परंपराएं हमारी पहचान हैं और इनका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। कार्यक्रम के समापन पर दीपदान का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्वलित कर सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। दीपों की पावन ज्योति ने सनातन परंपरा में प्रकाश, सकारात्मकता और शुभता के महत्व को साकार किया। इस आयोजन में रीना केशरवानी, ममता, सुधा, निशा, राधा, नीतू, सविता, अंजना, शोभा, खुशबू, पिंकी, मनीषा, पिंगला, अंजली, आरती, प्राची, पुष्पा, सुषमा, बबिता, अंशिका जायसवाल, दीपा सिंह, शबनम यादव और पूजा सिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। उत्सव-ए-डांडिया ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश दिया। यह आयोजन सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति समर्पण और नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण बना।


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