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Wednesday, October 28, 2026

बांदा में साहित्यकारों ने काव्य गोष्ठी में बांधा समां, महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुई चर्चा

बांदा, के एस दुबे । आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती, शरद पूर्णिमा, मीराबाई जयंती एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास के 61वें स्थापना वर्ष के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, चित्रकूट धाम मंडल बांदा इकाई के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कटरा स्थित सिंह वाहिनी मंदिर के राम दरबार मंदिर में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रामप्रताप शुक्ल मानस किंकर ने की। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में संरक्षक अशोक त्रिपाठी एडवोकेट जीतू, मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित तथा विशिष्ट अतिथि कवि अमरपाल सिंह राजावत उपस्थित रहे। गोष्ठी का कुशल संचालन गीतकार एवं महामंत्री डॉ. राजेश तिवारी रंजन ने किया। कार्यक्रम में पहुंचे सभी साहित्यकारों का स्वागत करते हुए उन्हें स्वल्पाहार कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद श्रीमती अंबे तिवारी ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर काव्य गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया।



कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां

काव्य पाठ के दौरान परिषद के कोषाध्यक्ष केवल प्रसाद द्विवेदी पंथी ने भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, "धर्म के पुजारी प्रिय राम, कौशल्या-दशरथ के हैं पुत्र ललाम।"

योगाचार्य गंगा शरण त्रिपाठी ने कर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रियाहीन वाणी से संसार में कुछ भी संभव नहीं है। ठाकुरदास शर्मा पंछी ने प्रकृति का सुंदर चित्रण करते हुए अपनी पंक्तियां प्रस्तुत कीं—

"अंबर ओढ़े ओढ़नी, पहने मोती माल।

चंद्र चमकता दीप-सा, धरती मालामाल।।"

गीतकार डॉ. राजेश तिवारी रंजन ने मन की भावनाओं को अभिव्यक्त किया। आरसी योगा ने दीपक और बाती के माध्यम से प्रकाश का महत्व बताया। कवयित्री अंबे तिवारी ने कहा—

"जिस द्वार हरे तुलसी के दल,

उस घर का पानी गंगाजल।"

वहीं अमरपाल सिंह राजावत ने राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, "मरा-मरा कहते रहे तो आश्रम आए राम।" सभी रचनाओं पर उपस्थित श्रोताओं ने सराहना की।


महर्षि वाल्मीकि के योगदान पर हुई चर्चा

मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के मौलिक अंशों पर प्रकाश डालते हुए उनकी व्याख्या की। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के साहित्यिक योगदान और रामायण की महत्ता को रेखांकित किया। संरक्षक अशोक त्रिपाठी एडवोकेट जीतू ने महर्षि वाल्मीकि को बांदा का गौरव बताते हुए लालापुर में उनके निवास स्थान से संबंधित जानकारी साझा की। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे रामप्रताप शुक्ल मानस किंकर ने महर्षि वाल्मीकि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आदिकवि वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम के धरती पर अवतरित होने से पहले ही रामायण की रचना कर उनके जीवन चरित्र का वर्णन किया। अंत में अध्यक्ष ने सभी साहित्यकारों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।





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