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Monday, January 12, 2026

निरंकारी सत्संग भवन में बही भक्ति और ज्ञान की धारा

बांदा, के एस दुबे । भक्ति केवल शब्द नहीं, जीवन जीने की सजग यात्रा है। सच्ची भक्ति तब है जब हम आत्ममंथन द्वारा दूसरों से पहले स्वयं को जांचे। अपनी कमियों को सुधारे और हर पल जागरुक जीवन जिएं। शास्त्री नगर स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित भक्ति पर्व समागम पर ज्ञान प्रचारक दिलीप सिंह की मौजूदगी में विशाल सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें सतगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा हरियाणा स्थित समलखा में आयोजित भक्ति पर्व के संबोधन पर प्रकाश डालते हुए जन कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया गया। ज्ञान प्रचारक दिलीप सिंह ने

निरंकारी सत्संग भवन में मौजूद निरंकारी भक्त।

सतगुरू माता के सदोपदेशों पर प्रकाश डाला। इस दौरान श्रद्धालुजनों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेकर भक्ति, सेवा एवं समर्पण के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। समागम के दौरान वक्ताओं, कवियों, गीतकारों ने अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से गुरू महिमा, भक्तिभाव और मानव कल्याण के संदेशों को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पूर्व निरंकारी राजपिता ने भक्ति पर्व पर बताया कि भक्ति कोई पद पहचान या अपनी बनाई परिभाषा नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान पाकर कर्ता भाव के समाप्त होने से उपजा जीवन जीने का ढंग है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।


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