यथास्थिति आदेश की खुलेआम अवहेलना, प्रशासन की भूमिका कटघरे में
फतेहपुर, मो. शमशाद । शहर के कस्बा दक्षिणी में कालीकन मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक मंडेर तालाब (गाटा संख्या 2575, लगभग 14 बीघा) एक बार फिर भू-माफियाओं के निशाने पर है। हैरानी की बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद तालाब की जमीन पर तेजी से पुराई कर प्लाटिंग की कोशिश की जा रही है, जबकि प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। मंडेर तालाब न सिर्फ राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, बल्कि वर्षों से लोगों की आस्था और जल संरक्षण का केंद्र रहा है। देखरेख के अभाव में पहले तालाब को बदहाल किया गया, फिर राजस्व कर्मियों की कथित सांठ-गांठ से दबंगों को पट्टा दिलवाया गया। स्थानीय लोगों के विरोध और न्यायालय में याचिका के बाद उपजिलाधिकारी सदर फतेहपुर ने 25 अक्टूबर 2019
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| मंडेर तालाब पर हो रही पुराई का दृश्य। |
को धारा 38(1) के तहत आदेश पारित कर तालाब की जमीन को पुनः तालाब खाते में दर्ज कराया, और भूमिधरों के नाम निरस्त कर दिए गए। इसके बावजूद प्रशासन सात वर्षों तक सोया रहा। इसी उदासीनता का फायदा उठाकर अब फिर से तालाब की जमीन बेची जा रही है और अवैध कब्जे की कोशिश शुरू हो गई है। विरोध बढ़ने पर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां रिट संख्या 14239/2025 में 14 मई 2025 को माननीय न्यायालय ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लेखपाल की मिलीभगत से पूरा खेल खेला जा रहा है, और प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो मंडेर तालाब भी उन्हीं तालाबों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके नाम तो मोहल्लों में जिंदा हैं, लेकिन अस्तित्व जमीन से मिट चुका है। जिले में पहले ही नववहिया तालाब, कूढ़ तालाब, विक्टोरिया तालाब, चंडी तालाब, ककरहा तालाब, नारायण दास की कुटी का तालाब, रांड़न का तालाब, बागबादशाही, सत्ती देवी, सगरा, लालबिहारी और रानी का तालाब जैसे कई ऐतिहासिक जलस्रोत कागजों तक सिमट चुके हैं।


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