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Sunday, May 10, 2026

पहले क्लीन चिट, फिर जुर्माना- सोशल मीडिया के दबाव में दो पट्टाधारकों पर मामूली जुर्माना?

जब सवाल बढ़े तो जागा प्रशासन 

अवैध खनन पर कार्रवाई बनाम खानापूर्ति 

चित्रकूट, मो शमशाद । जिले में अवैध खनन को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच जिला प्रशासन की ताजा कार्रवाई ने नई बहस छेड़ दी है। मजे की बात यह है कि जिस प्रशासन ने अब तक खनन क्षेत्रों में किसी भी बड़े अवैध खेल से इनकार करते हुए मौके पर फोटो खिंचवा कर लगभग क्लीन चिट जैसी स्थिति बनाई हुई थी, वही प्रशासन अब सोशल मीडिया पर वायरल खबरों और शिकायतों के दबाव में दो खदान संचालकों पर लाखों रुपये का जुर्माना ठोकने को मजबूर दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देश पर ग्राम तीरधुमाई गंगू और गुरगौला खादर स्थित बालू-मोरम खदानों की संयुक्त जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि नदी की जलधारा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ या जलधारा के भीतर अवैध खनन नहीं मिला। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं

सोशल मीडिया में वायरल 04 मई को ओवरलोड ट्रक

खड़ा होता है कि अगर सबकुछ नियमों के मुताबिक था, तो फिर आखिर 5 लाख और 5.68 लाख रुपये का जुर्माना किस अनियमितता पर लगाया गया? प्रशासन ने गुरगौला खदान में 5 लाख 68 हजार 400 रुपये और तीरधुमाई गंगू खदान में 5 लाख रुपये की दंडात्मक कार्रवाई की है। लेकिन इलाके में चर्चा इस बात की है कि करोड़ों के कथित खनन खेल के सामने यह जुर्माना ऊंट के मुंह में जीरा जैसा प्रतीत हो रहा है। सवाल यह भी है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ बढ़ते जनदबाव और सोशल मीडिया की किरकिरी शांत करने के लिए की गई? क्योंकि यदि अनियमितताएं इतनी मामूली थीं, तो प्रशासन को कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी, और यदि गंभीर थीं, तो फिर केवल औपचारिक जुर्माने तक मामला सीमित क्यों रखा गया? जनता अब यह पूछ रही है कि क्या चित्रकूट में अवैध खनन पर वास्तव में नकेल कसी जा रही है या फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी तलवारें लहराई जा रही हैं। प्रशासन ने जिला टास्क फोर्स को सख्त कार्रवाई के निर्देश जरूर दिए हैं, लेकिन कार्रवाई पर जनता संशय में है।


प्रशासनिक सख्ती- करोड़ों के खेल में पांच लाख का भारी जुर्माना अवैध खनन को लेकर बड़ा सवाल अब खुलकर उठने लगा है। करोड़ों रुपये के कथित खनन खेल में 5 लाख का जुर्माना आखिर कितनी अहमियत रखता है? इलाके में चर्चा है कि खनन माफिया तो कई बार इससे कहीं ज्यादा रकम नजराने की तरह खर्च कर देते हैं। ऐसे में यह दंड क्या सचमुच सजा है या सिर्फ जनता को दिखाने के लिए बजाया जा रहा प्रशासनिक झुनझुना? पिछले तीन महीनों से सोशल मीडिया और समाचार माध्यम लगातार अवैध खनन की तस्वीरें और वीडियो दिखा रहे हैं, लेकिन प्रशासन हर बार मौके पर पहुंचकर फोटो खिंचवाने और क्लीन चिट देने में ज्यादा सक्रिय नजर आया। अब जनता पूछ रही है क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों में होगी या कभी जमीन पर भी दिखेगी?


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