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Monday, August 10, 2026

नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप

पैतृक पुजारी परिवार ने डीएम से की शिकायत

ट्रस्ट बनाकर करीब 10 बीघा जमीन हड़पने की जताई आशंका

बबेरू/बिसंडा/बांदा, के एस दुबे । बिसंडा थाना क्षेत्र के दूल्हा थोक, गांधी नगर स्थित ऐतिहासिक नर्मदेश्वर महादेव विराजमान मंदिर की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर से जुड़े पैतृक पुजारी परिवार ने कुछ लोगों पर फर्जी ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर से जुड़ी करीब 10 बीघा भूमि पर कब्जे का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर पीड़िता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।


शिकायतकर्ता पुष्पा देवी पुत्री स्व. कोदिया एवं स्व. रामेश्वर प्रसाद, पत्नी ऋषि रंजन, निवासी दूल्हा थोक गांधी नगर, बिसंडा ने आरोप लगाया कि नीलम पत्नी आशीष, आशीष पुत्र अनुसुइया, अनुसुइया पुत्र केदार, पप्पू पुत्र केदार निवासी रमयापुर, थाना पहाड़ी, जनपद चित्रकूट समेत कुछ अन्य लोग मंदिर की जमीन पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं।

लेखपाल की मिलीभगत का भी आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विपक्षियों ने कथित रूप से बिना पुजारी परिवार को जानकारी दिए लेखपाल बिसंडा विनोद रावत की मिलीभगत से मंदिर से संबंधित गाटा संख्या 2348, रकबा 2.829 हेक्टेयर के दो-तिहाई हिस्से, यानी करीब 10 बीघा भूमि पर ट्रस्ट का पंजीकरण कराने का प्रयास किया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर भूमि एवं मंदिर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।

मां करती थीं मंदिर की सेवा

पुष्पा देवी का कहना है कि उनकी मां श्रीमती कोदिया जीवनभर नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की सेवा-शुश्रूषा करती रहीं। मां के निधन के बाद वह अपने पिता के साथ मंदिर की देखरेख करती रही हैं। उनका आरोप है कि अब मंदिर की संपत्ति पर कुछ लोगों की नजर है और कथित रूप से ट्रस्ट बनाकर मंदिर की भूमि को हड़पने अथवा बेचने की साजिश की जा रही है।

डीएम से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग

पीड़िता ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा मंदिर और उससे जुड़ी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर जिलाधिकारी ने अतर्रा एसडीएम को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही मंदिर की भूमि, कथित ट्रस्ट और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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