आयुर्वेद-यूनानी पंजीयन वाले क्लिनिक में एलोपैथी प्रैक्टिस के गंभीर आरोप - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Tuesday, August 11, 2026

आयुर्वेद-यूनानी पंजीयन वाले क्लिनिक में एलोपैथी प्रैक्टिस के गंभीर आरोप

एलोपैथी की डिग्री व पंजीयन संबंधी सवालों पर नहीं मिला स्पष्ट जवाब, 

भर्ती मरीजों को हटाने और दवा वितरण समेटने का आरोप

बांदा, के एस दुबे । तिंदवारी क्षेत्र में आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग में पंजीकृत बताए जा रहे एक निजी क्लिनिक में एलोपैथी पद्धति से उपचार किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि संबंधित क्लिनिक में एलोपैथी की वैध डिग्री अथवा पंजीयन के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होने के बावजूद मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। मरीजों को ड्रिप चढ़ाने और प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं देने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मामला ममता क्लिनिक, भिड़ौरा रोड, तिंदवारी का है। क्लिनिक के संचालक ने मीडिया के सवालों 


के दौरान स्वयं को आयुर्वेद शास्त्री डिग्रीधारी बताया। जब उनसे एलोपैथी चिकित्सा की डिग्री, संबंधित पंजीयन, चिकित्सकीय स्टाफ की जानकारी, फार्मासिस्ट की नियुक्ति तथा फार्मेसी लाइसेंस आदि के संबंध में जानकारी मांगी गई तो स्पष्ट दस्तावेज अथवा पंजीयन की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

प्रत्यक्ष पूछताछ के दौरान कथित तौर पर क्लिनिक परिसर में अफरातफरी की स्थिति बन गई। आरोप है कि वहां भर्ती मरीजों को हटाया जाने लगा और तखत पर बैठकर दवाओं का वितरण करने वाले कर्मचारी अपना सामान समेटने लगे। इस घटनाक्रम ने क्लिनिक में संचालित चिकित्सा गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


विभागीय पंजीयन और एलोपैथी उपचार में अंतर की जांच जरूरी

जानकारों के अनुसार किसी चिकित्सा संस्थान का आयुर्वेद अथवा यूनानी पद्धति के तहत पंजीकृत होना अपने आप में एलोपैथी चिकित्सा करने की अनुमति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित क्लिनिक में किस पद्धति से उपचार किया जा रहा है और वहां उपचार करने वाले चिकित्सकों के पास संबंधित चिकित्सा पद्धति की वैध शैक्षणिक योग्यता एवं पंजीयन है अथवा नहीं। इसके अलावा क्लिनिक में भर्ती मरीजों का उपचार, ड्रिप लगाने, दवाओं का वितरण, प्रिस्क्रिप्शन जारी करने तथा फार्मेसी संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच की आवश्यकता है।

कार्रवाई के बजाय चुप्पी पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई क्लिनिकों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक पंजीयन के उपचार किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं होने से कथित रूप से संचालकों के हौसले बढ़ रहे हैं। ममता क्लिनिक के मामले में भी अब सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित संस्थान और वहां कार्यरत चिकित्सकीय स्टाफ के दस्तावेज नियमानुसार हैं तो स्वास्थ्य विभाग उनकी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच, क्लिनिक के पंजीयन, चिकित्सकों की डिग्री एवं पंजीयन, स्टाफ की योग्यता, फार्मेसी लाइसेंस और मरीजों के उपचार से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्लिनिक में किस चिकित्सा पद्धति के तहत उपचार किया जा रहा था और क्या सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां मौजूद हैं।





No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages