बिजनौर, संजय सक्सेना । कॉक्लियर इम्प्लान्ट सर्जरी के सम्बन्ध में जिलाधिकारी रमाकान्त पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रट कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, संयोजक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शामिल हुए।
बैठक का मुख्य मुद्दा था श्रवण बाधित/बहरे बच्चों का चिन्हीकरण व उनकी सर्जरी। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे बच्चे जो सुन नहीं पाते (श्रवण बाधित बच्चे/बहरे बच्चे) वे प्राय: बोल भी नहीं पाते। ऐसे बच्चों में से अधिकांश बच्चों के कान का इलाज सर्जरी द्वारा किया जा सकता है। इस प्रकार की सर्जरी को कॉक्लियर इम्प्लान्ट सर्जरी कहा जाता है। यह सर्जरी 05 वर्ष तक के उम्र वाले बच्चों की होती है। इसमें 6 लाख रूपये की धनराशि का खर्च आता है। सरकार द्वारा यह सर्जरी नि:शुल्क कराने की व्यवस्था की गयी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे अभिभावक/माता-पिता, जिनके बच्चे मूक-बधिर/गूंगे-बहरे हो एवं बच्चे की उम्र 05 वर्ष से कम हो, वे इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए निकट आंगनबाडी केन्द्र पर जाकर सूचना दें। यह सूचना नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी दे सकते हंै। जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से यह अपेक्षा की है कि दिनांक 31 अगस्त 2019 से पूर्व उक्त बच्चों की सूची मुख्य चिकित्साधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें, जिससे कि चिन्हित बच्चों को अभिभावकों के साथ बुला कर प्राथमिक रूप से परीक्षण एवं काउंसलिंग किया जा सके।


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