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Tuesday, April 20, 2021

दूसरे पर विश्वास ना कर स्वयं हकीकत देख निर्णय लेने जरूरत ............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

.........जब राज्य का राजा सुख-दुख के लिए भेष बदलकर अपने राज्य का दौरा करता था कि हमारे राज्य में हमारे सैनिक हमारे अधिकारी हमारे कर्मचारी जनता को परेशान तो नहीं कर रहे हैं राजा के बारे में क्या क्रिया प्रतिक्रिया है यह सब जानने के लिए भेज बदला जाता था वह राजा होते थे जो जनता के साथ दिल से जुड़े होते थे सिर्फ नाम से नहीं लिखने भर के लिए नहीं थे हकीकत में जाकर देखते भी थे तब उन्हें विश्वास होता था लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है,आज के कठिन दौर में कोई भी सरकारी विभाग का कर्मचारी उस अधिकारी का फोन उठा लेता है सरकारी विभाग में तो फोन उठा लिए जाते हैं परंतु प्राइवेट संस्थानों में कोई भी व्यक्ति एक बार फोन कर देता है उसका फोन लॉक कर दिया जाता है दोबारा फोन ना कर सके और उनकी जो लैंडलाइन है वह भी रिंग जाती रहती है कोई उठाता नहीं है। आज मैं बात करता हूं विश्व की सबसे विशालतम परिवार की जो भारत का बहुत ही विशाल परिवार के रूप में जाना जाता है जिस का कारोबार गोरखपुर से ₹2000 से शुरू हुआ था चिटफंड कंपनी की बात कर रहा हूं जिसमें इंसानियत मानवता मर्यादा सब भूल गई है क्यों ना भूले जब उस संस्थान का सर्वे सर्वा अपने परिवार से


ताल्लुक नहीं रखता है अपना परिवार से मिल सकता है ना परिवार का कोई व्यक्ति अपनी बात सही वहां तक पहुंचा सकता है तब आप न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं, जिन लोगों के माध्यम से बात हो सकती है वह लोग अपने फोन अटेंड नहीं करते हैं लोगों की परेशानियों को दिक्कतों को दूर करने की जगह और गांठ हो पर गांठ लगाते रहते हैं जो उस चिटफंड के मुखिया ने जिन लोगों को नियुक्त किया है वह निर्णय सिर्फ परिवार के नाम से एक पद तक न्याय की उम्मीद होती है परंतु उस पद के नीचे जितने भी सत्यता आप उस पद के रूप में जिस पद की बात मानी जाती है उस पद की आप शिकायत करते हैं तो आप को दंडित किया जाता है ऐसा परिवार है। कभी सपने में सोचा गया था विश्व का विशालतम परिवार कैसे बना और इतनी जल्दी आज पतन की स्थिति बन गई इसका मुख्य कारण आज मैं आपको संक्षेप में बताता हूं। भारत देश मैं अंग्रेज जब आए थे ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की एक व्यापार के रूप में धीरे-धीरे उन्होंने अपने पैर फैलाए भारत के लोगों को समझा अंग्रेज दिमाकी तो थे उन्होंने सोचा है भारत की जनता बहुत बड़ी मूर्ख है लालची है इनको लोगों से इन्हीं को मरवा सकते हैं हम बड़ी अच्छी तरह राज करेंगे और उन्हें देश में संख्या बल अधिक होने के बावजूद भी हमें गुलाम बना दिया उनके एक अधिकारी की हम बात मान जाते थे 100 आदमी और कभी हम सब इकट्ठे नहीं हो पाते थे उस एक आदमी को गिरा दे और उन्होंने राज किया जब भारत के लोग धीरे-धीरे समझने लगे गुलामी की और हम आगे बढ़ते जा रहे हैं तब हमारे वीर सावरकर चंद्र शेखर आजाद सुभाष चंद्र बोस भगत सिंह सुखदेव राजगुरु चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई बहुत से ऐसे वीरांगना से लेकर महापुरुष जिस देश को आजादी अंग्रेजों से दिलाई और हम आजाद हुए, लेकिन इस आजादी में कितनी लोगों को अपनी जान कुर्बान करनी पड़ी इस देश की आजादी को पाने के लिए कितने लोग शहीद हुए उनको मैं हृदय से चरण स्पर्श नमन करता हूं। किस बात का होता है करता कोई है वह भरता कोई है अगर आजादी भारत को मिली जो लोग आजादी का सुख नहीं हो पाए अगर वह अपना विचार कर लेते कि हम अंग्रेजों के साथ मिलकर अपने परिवार को सुख चैन से ऐसो आराम से रखें आजादी तो पूरे भारतवर्ष की यह हम क्यों लड़ाई करें हमें अपना देखना है अपना परिवार देखना है क्याआजादी मिल सकती थी कि एस विचारधारा के रूप मेरा जवाब तो यही होगा नहीं,....... अहंकार एक ऐसी चीज है जो मनुष्य को घर मिला देती है जो निर्णय लेने में भेदभाव करते हैं परिवार के नाम से छलावा है यह कहावत कही गई है दूर के ढोल सुहावने लगते हैं आज की स्थिति में अंदर क्या है उसके अंदर रहने वाला ही व्यक्ति जानता है बाहर वाला तो देख रहा है सूट बूट गाड़ी घोड़े में हम सब देख रहे हैं सब बेहतर है और अंदर क्या है उसका पता जब चलता है जब किंगफिशर के मालिक विजय माल्या की ब्रांड एमेस्टर दीपिका पादुकोण फिल्मी एक्टर कितना पैसा उन्होंने लुटाया जब हकीकत खुली देश छोड़कर भाग गए यह सब स्थित बनती है नीरव मोदी का अभी-अभी भारत आने की लिए संधि हो गई है बेटे ने अपनी सहमत प्रदान कर दिए नीरव मोदी भारत सरकार उनको शीघ्र ही भारत लाएगी इसलिए जो दिखता है वह है नहीं जो है वह दिखता नहीं बस यही से कहानी बिगड़ती है हमें वही दिखने लगे सत्य दिखने लगे और हमारे जो चापलूस हैं वह हमें बरगलाए नहीं सत्य को बताते रहें तो मुझे लगता है आदमी इतना गर्त में ना गिर जाए पर ऐसा हो नहीं पाता चापलूस लो अपनी कमाई में लगे रहते हैं और उन्हें सच्चाई से रूबरू नहीं होने देते क्योंकि सच्चाई पहुंचाने वाले नीचे से लेकर ऊपर तक सब एक डोरी से बंधे हैं उस दूरी को समझने की जरूरत कभी नहीं समझते यही कारण है हाज विशालतम परिवार परेशानी से ग्रस्त है। हर व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर कांटेक्ट नंबर लैंडलाइन नंबर सब बंद कर दिए जाते हैं किसी की कोई परेशानी को सुनने वाला नहीं है कोई भी व्यक्ति अगर एक बार फोन कर दिया दोबारा उसका फोन उसफोन पर नहीं हो सकता ऐसी लोगों ने शिकायतें व्यक्त किया सच्चाई से जुड़ना चाहते हैं बचना चाहते हैं सही का निर्णय देने में सक्षम नहीं है सही बात सुनने की क्षमता नहीं है सही बात सुनने की क्षमता रखते भी हो हो सकता है ऊपर से दबाव बहुत सी बातें हो सकती हैं । सत्य से बचना बड़ा मुश्किल है क्योंकि सत्य परेशान होता है पराजित नहीं इसलिए सत्य के पथ पर चलने के लिए किसी लाव लश्कर की जरूरत नहीं है असत्य के पीछे धनबल बाहुबल राजनीतिक संरक्षण और माफिया सभी उनके दोस्त हैं लेकिन सत्य के साथ जो कटु सत्य है वह उस व्यक्ति के साथ होता है जिसका नाम है भगवान ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु ईसा मसीह साईं जी यह सब उनके पास है फिर मुझे नहीं लगता है कि वह व्यक्ति अकेला है इतने लोगों के साथ होने के बावजूद वह अपने को इन लोगों की ऊपर छोड़ देता है। भगवान अब आप ही देखो अल्लाह आप ही देखो वाहेगुरु आप ही देखो ईसा मसीह आप ही देखो साईं जी आप ही देखो  इतने  भगवान हैं सत्य के साथ फिर डर किस बात का जब यह सब हमारे साथ  फिर जो होगा अच्छा ही होगा ऐसी वहां के कुछ परेशान लोगों ने हमसे बात कही मैंने लेखनी के माध्यम से प्रबंध तंत्र को तक पहुंचाने के लिए मैंने उन लोगों की भावना को देखते हुए लिखने का प्रयास किया है बहुत से लोग आज परेशान हैं कुछ आज के कोरोना से परेशान हैं कुछ लोग अत्याचार से परेशान हैं कुछ लोग तानाशाही से परेशान हैं कुछ लोग जबरदस्ती नौकरी से निकाल दिए गए परेशान हैं कुछ लोगों का भगाने के लिए दूरदराज ट्रांसफर कर दिया गया वह परेशान है सबकी परेशानियों को देखते हुए जिसने वास्तव में अहित किया है गलत संदेश पहुंचाया है पद का दुरुपयोग किया है वह व्यक्ति आज ऐसो आराम में रह रहा है उस विश्व का बड़े परिवार के रूप में जाना जाता है वह आज भी लूट का सूट कर रहे हैं और मस्त है वेतन मिले या ना मिले इतना तो वह दाएं बाएं से वह अधिकारी कहां ले रहे हैं आज के इस गर्दिश के दिनों में भी क्योंकि उनको पावर है इधर का माल उधर उधर का माल इधर करने में उनको उस विश्व के विशालतम परिवार ने पूरी छूट दे रखी है और किसी व्यक्ति ने उनके इधर कमाल उधर करने के बारे में अगर बताने का प्रयास किया सबूत भेजें उसको वहां से निकाल दिया गया यह विश्व का विशालतम परिवार की सच्चाई है जो कहते हैं सत्य परेशान होता पराजित नहीं मैं कहता हूं सत्य जहां पर होता है वहां पर सत्य की सुनने वाला व्यक्ति होता है सत्य की रखने वाला व्यक्ति की बात को सुना जाता है वहां पर यह बात लागू होती है सत्य परेशान होता है पराजित नहीं जहां पर सब कुछ जानते हुए भी सत्य को भूलकर असत्य के पथ पर चलकर निर्णय दिए जाते हैं वहां पर यह नियम लागू नहीं होता है और ना यह सौगंन नहींअच्छा लगता है उस देश के विशालतम परिवार के नाम से परिवार की पहचान बना कर रखी है वहां पर सिर्फ एक यह दोहा है सच्चाई का वास्ता दूर दूर दूर दूर तक नहीं है। इसलिए बात रखने के लिए कोई मंच होना चाहिए कोई स्थान होना चाहिए जहां पर सच्चाई की बात को रूबरू किया जा सके लेकिन मैंने आज इसलिए लिखा हूं मैंने देखा है जब वह विश्व का विशालतम परिवार में 2012 की पहले कि हम बात बताते हैं बहुत ही खराब स्थित रही है फील्ड के सैकड़ों कर्मचारी बहुत बहुत गंभीर बीमारियों से ग्रस्त रहे इसका मुख्य कारण रहा कि डिप्रेशन मैंने बहुत से कर्मचारियों को देखा जो अधिकारियों के तानाशाह इसके कारण काल के मुंह में चले गए उनकी परिवार की दशा को मैंने देखा उस विशालतम परिवार ने व्यक्ति के मरने के बाद उस परिवार के दर दर पत्नी बच्चे भटकते रहे लेकिन अधिकारी जो बैठे हैं ऊपर सक्षम और चेंबर में रसगुल्ले पकौड़ी तली हुई मछली पकौड़ी क्या ना क्या बनवा बनवा कर बैठ कर खाते थे, और कह देते थे अपने सिपहसालार ओं से कह दो मीटिंग में है बैठो कुछ देर अभी बुलाएंगे बेचारे बहराइच से आ रहे हैं कोई प्रतापगढ़ से आता था कोई बस्ती से आता था कोई देवरिया से था और जब अधिक समय हुआ फोन पर बोला किसा मीटिंग में है बाहर जा रहे हैं 1 हफ्ते बाद आना अभी मिल नहीं पाएंगे और वह परिवार बस अड्डे पर रात भर सोया भूखा प्यासा ऐसी दशाएं मैंने देखी है बड़ा दुख होता है जिस परिवार का व्यक्ति आपकी संस्था में कार्य कर रहा है और उसकी मृत्यु हो जाती है और उसका परिवार आता है एक-एक रोटी को तरस रहा है और किसी से पैसा उधार लाकर बस अड्डे में भूखा स्टेशन पर भूखा रात काटता है सुबह जब आपके पास ऑफिस आता है तो आप उसको मीटिंग का बहाना बनाकर उसको भगा देते हो उस व्यक्ति के दिल से क्या निकलेगा अच्छा निकलेगा वह मजबूर है दुखी है एक दोस्त का बाप नहीं है उसकी मां बेचारी परेशान है उसकी बहन परेशान है रोजी रोटी का कोई सहारा नहीं है और उसको मीटिंग के नाम से भगा देते हो लेकिन आप उसको भगाते हो ऊपर वाला भगवान और सब देख रहा है वह कहीं ना कहीं से उसकी मदद करता है और वही मदद आज के दिन दिखा रही है उसी पापों का परिणाम जब राजा पुराने जमाने में होते थे भेष बदलकर अपनी प्रजा का हाल-चाल लेने जाते थे कहीं हमारे आदमी हमारी प्रजा का अहित तो नहीं कर रहे हैं हमारे राज्य में जो रह रहा है उसके साथ अन्याय हो रहा है हमारे सिपाही हमारे अधिकारी हमारे लोग किस तरह का व्यवहार जनता से कर रहे हैं यह सब जानने के लिए राजा भेष बदलकर जाता है और यहां तो सब राजा है और जहां पर सब राजा होंगे वहां पर न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

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