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Thursday, November 10, 2022

पहाड़ों में अवैध खनन, ब्लास्टिंग पर जताई चिंता

पहाड़ फसल जीवन पर्यावरण बचाओ गोष्ठी आयोजित

स्वामी मदन गोपाल दास ने रोक लगाने की बात कही

बांदा, के एस दुबे । गिरवां इलाके के जरर गांव में पहाड़, फसल, जीवन पर्यावरण बचाओ अभियान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कामदगिरि प्राचीन द्वार के प्रमुख स्वामी मदनगोपाल दास मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। गोष्ठी में क्षेत्र के कई पहाड़ों में अवैध खनन किए जाने और क्रेशर चलने से फसल व जनजीवन को नुकसान पहुंच रहा है, इस पर चिंता जताई गई। ग्रामीणों और मुख्य अतिथि ने एक स्वर से अवैध खनन पर रोक लगाए जाने की मांग की है।
गोष्ठी में मौजूद महंत मदनगोपाल दास व ग्रामीण

गिरवां क्षेत्र के जरर गिरवा, पतरहा आदि गांव में पर्वतों में शिव मंदिर विराजमान हैं। गिरवा में भूतेश्वर बाबा, पतरहा में किसगूर बाबा, जरर में प्राचीन शिव मंदिर पर्वतों की श्रृंखला पर विराजमान है। पिछले कई महीनों से पहाड़ खोदने वाले माफिया अवैध ब्लास्टिंग करके पर्वतों को क्षति पहुंचा रहे हैं। वहां के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोगों की आस्था के केंद्र शिव मंदिर खतरे में हैं जिसको लेकर लोग परेशान हैं। इसके अलावा गिरवा क्षेत्र में 6 क्रेशर लग चुकी हैं तथा दर्जनों क्रेशर को अनुमति दी जा चुकी है। बिना किसी सर्वे के अनुमति दी गई है। पर्यावरण बचाओ गोष्ठी में स्वामी मदन गोपाल दास महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार सभी पर्वत भगवानों द्वारा बनाए गए हैं। ऐसे में पहाड़ व मंदिरों को क्षति पहुंचना एक बहुत बड़ा मुद्दा है। आम जनजीवन इससे प्रभावित हो रहा है तथा प्राकृतिक असंतुलन पैदा हो रहा है। सरकार को तत्काल इस ओर ध्यान देते हुए इस पर उचित कार्यवाही करना चाहिए। साथ ही अवैध खनन व क्रेशर पर प्रतिबंध लगना चाहिए। स्वामी मदन गोपाल दास महाराज ने कहा कि गिरवां क्षेत्र की पहाड़ियां बहुत ही प्राकृतिक रूप से सुंदर हैं। यहां पर सरकार पर्यटन को बढ़ावा दे सकती है। अगर इन धार्मिक स्थलों का सुंदरीकरण किया जाए तो पर्यटन के लिए बहुत ही सुंदर क्षेत्र है। गिरवा क्षेत्र की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। फसलों में सफेद धूल जमा हो रही है, जिसकी वजह से फसलें बर्बाद हो रही हैं। यदि यही स्थिति 3-4 साल तक रही तो कई गांव के लोग पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे। पहाड़ों में 24 घंटे ब्लास्टिंग का काम होता है जिससे गांव वालों का जीवन संकट में है। मानक के विपरीत 2 इंची की जगह 6 इंची का होल करके ब्लास्ट किया जाता है। इससे मंदिर व लोगों के घर तक हिल जाते हैं। वही खुदाई करने वाले आवश्यकता से अधिक गहराई तक जा कर खोद रहे हैं। जिससे भूगर्भ का पानी भी प्रदूषित व असंतुलित होने की पूरी संभावना है। यदि जल्द ही सरकार ने रोक नहीं लगाई तो हजारों की संख्या में लोग बेघर हो जाएंगे और पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे। पर्यावरण गोष्ठी में स्थानीय लोगों ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार और प्रशासन नहीं सुनता तो कोर्ट तक पूरा मामला लेकर के जाएंगे।

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