पीड़िता ने डीएम से की शिकायत
फतेहपुर, मो. शमशाद । हसवा विकास खंड के बेर्राव गांव में क्षेत्रीय लेखपाल व कानूनगों द्वारा जिलाधिकारी के आदेश को ताख में रखकर घरौनी की जमीन पर मोटी रकम लेने के बाद कब्जा कराने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता पिंकी पत्नी विमल सरोज में बताया कि शासन द्वारा उनके पति विमल सरोज को घरौनी आवंटित की गई थी। गांव के आबादी वाली जमीन में घरौनी निर्माण के लिए जगह भी आवंटन की गई उसने बताया कि उसके पति विमल सरोज भी लेखपाल हैं और शहर में तैनात हैं। शिकायती पत्र में बताया कि गाटा संख्या 660 में 226 प्लॉट नंबर उनको मिला था जिस पर गांव के ही कुछ लोग लेखपाल से साठ गांठ करके जमीन पर जबरन कब्जा करने के लिए झोपड़ी बना लिया है। शिकायतकर्ता पिंकी ने बताया कि उनके परिवार के झूरी को घरौनी बनाने के लिए प्लॉट नंबर 65, रामखेलावन को 66, बच्चीलाल को 64, बछराज को 227 व उनके पति विमल सरोज का 226 नंबर है। शिकायत पत्र में बताया कि परिवार के छेद्दू को भी आबादी की जमीन
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घरौनी की जमीन का दृश्य। |
में प्लांट 228 मिला था लेकिन छेददू की ससुराल सनगांव में है जिसके चलते वह गांव में नहीं रहता था। उसके प्लांट को तीसरे नंबर के भाई रामखेलावन ने गांव के ही राम नारायण पुत्र सागर के हाथों बेच दिया था लेकिन छेददू का पुत्र जितेंद्र जो सनगांव रहता है और अपने चाचा झूरी सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर अब विमल सरोज के प्लाट में जबरन कब्जा कर रहा है जिसको लेकर कई बार शिकायत भी की गई। इतना ही नहीं जितेंद्र ने विमल सरोज के खिलाफ 15 जून 2024 को जिले के आला अधिकारियों से शिकायत की थी जिस पर जांचों उपरांत तत्कालीन लेखपाल अभिलाषा ने 28 जून तथा जितेंद्र की ऑनलाइन शिकायत पर तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल शोभा साहू ने मामला असत्य पाकर विमल सरोज के पक्ष में एक अगस्त 24 को रिपोर्ट लगाकर जिले के आलाधिकारियों को अवगत कराया था। शिकायत पत्र में यह भी बताया गया कि दोनों लेखपालों के बाद रामबाबू सोनकर की तैनाती होने के बाद विपक्ष से मोटी रकम लेकर पूरे मामले को घुमा दिया गया यहां तक की कानून को उत्तम सिंह को भी लेखपाल ने मोटी रकम के माध्यम से अपने पक्ष में ले लिया और शिकायतकर्ता की जमीन पर जबरन कब्जा करने के लिए विपक्ष की झोपड़ी डलवा दी। शिकायत पत्र में यह भी बताया कि प्रार्थना कई बार इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी व तहसील दिवस में भी की गई। जिस पर अधिकारियों द्वारा जांच के आदेश दिए गए लेकिन लेखपाल व कानूनगो ने नायब तहसीलदार को गुमराह कर मौके पर जांच करने के लिए नहीं जाने दिया। शिकायतकर्ता ने इस मामले की जांच कर अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
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