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Sunday, June 22, 2025

बंद पड़े संस्कृत विद्यालय का कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने जाना हाल

विद्यालय के कमरों में भंडारे का बनाया जा रहा प्रसाद, शिक्षण कार्य नहीं होता

कांग्रेस आला कमान को रिपोर्ट देगा प्रतिनिधि मंडल, ग्रामीणों से की पूछताछ

बांदा, के एस दुबे । नरैनी विधानसभा अंतर्गत ग्राम पुंगरी में लंबे समय से कागज में चल रहे महावीर संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की हकीकत को जांच पड़ताल करने के लिए रविवार को कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल गांव पहुंचा। वहां पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूरज बाजपेई एआईसीसी सदस्य रमेशचंद्र कोरी, महेश प्रसाद ने रविवार को पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत करते हुए हकीकत जानी। नरैनी विधानसभा अंतर्गत ग्राम पुंगरी मैं प्रसिद्ध हनुमान मंदिर स्थल में महावीर संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिसमें कई वर्षों से ताला लटका हुआ है। विद्यालय के कमरों में मंदिर के भंडारे के लिए खाना बनाने का कार्य हो रहा है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता सूरज बाजपेई एआईसीसी सदस्य रमेश चंद्र कोरी व महेश प्रसाद ने रविवार को स्थित विद्यालय में पहुंचकर मंदिर के महंत व मौजूद ग्रामीण के लोगों से हकीकत जानी। उक्त विद्यालय में लंबे समय से ताला लटका हुआ है। ग्रामीण

पुंगरी गांव में ग्रामीणों से जानकारी हासिल करते कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल सदस्य

लोगों ने बताया कि कई वर्षों से विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य नहीं हो रहा, न तो कोई छात्र आ रहा और ना ही शिक्षक जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कागज पर ही संस्कृति को बढ़ाने का और बढ़ाने का कार्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। मंदिर के महंत ने भी बताया कि कई वर्षों से यहां कोई छात्र और पठन-पाठन का कार्य नहीं हो रहा। कहा कि सरकार देश में सनातन और संस्कृति की रक्षा के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। संस्कृत को बचाने वाला यह संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिस तरह से कई वर्षों से ताला लटका है और जनता की गाढ़ी कमाई को डकार जा रहा है, कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश की सरकार पर सवाल खड़ा कर रहा है। वाजपेई उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कागज पर चल रहे विद्यालय की हकीकत को अवगत कराने की बात कही। एआईसीसी सदस्य रमेश चंद्र कोरी ने कहा कि जिस प्रकार से केवल यह सरकार भाषण में संस्कृत को बचा रही है, स्पष्ट हो रहा है कि जब तक संस्कृत विद्यालय धरातल पर नहीं चलेंगे संस्कृत कैसे बचेगी।


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