गज और ग्राह का प्रसंग सुनकर श्रोता भावविभोर
बांदा, के एस दुबे । गिरवाँ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस के पावन प्रसंग में परम पूज्य महराज श्री ने गज और ग्राह का प्रसंग श्रवण कराया। जब हाथी पर विपत्ति आयी सब छोड़ के चले गये और जब उसने भगवान को पुकारा भगवान तुरंत ही गरुड़ छोड़ भागे। ग्राह का मस्तक धड़ से अलग कर दिया और गजराज की रक्षा की। आगे की कथा प्रसंग में समुद्र मंथन हुआ समुद्र से चौदह रत्न निकले और भगवान ने मोहनी अवतार लेकर देवताओं को अमृत पिलाया और उनकी रक्षा की! भगवान कहते है जो मेरी शरण में रहते है उनका कभी अनिष्ट नहीं हो सकता! वामन अवतार भगवान प्रकट होकर राजा बलि के यहाँ पधारे और उनसे तीन पग भूमि का दान लेकर सम्पूर्ण सम्पत्ति देवताओं को प्रदान कर दी और बलि को सुतल लोक का राज्य देकर स्वयं बलि के द्वारपाल बन गये! भगवान अपने
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| श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु। |
भक्तों के लिए सब कुछ बनने को तैयार है! केवल हमारे अन्दर भगवान के प्रति भक्ति होनी चाहिए !कथा के प्रसंग में पूज्य महराज श्री ने श्रीराम कथा के प्रसंग में श्री राम,लक्ष्मण, भरत,शत्रुघ्न चारो भाइयों के जन्म से अयोध्या में बधाई उत्सव मनाया गया!इसके बाद भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ तथा गोकुल में भगवान पहुंचे मैया यशोदा और नन्द बाबा के यहाँ भगवान ने अवतार लेकर गोकुल में सभी लोग प्रसंन्न हो गये और गोकुल में धूमधाम के साथ नन्द उत्सव भगवान का दिव्य उत्सव मनाया गया! कथा परीक्षित श्रीमती कल्पना, श्री श्यामाचरण उपाध्याय अपने कुटुंब व सभी भक्तों ने मिलकर बधाईयों का आनन्द प्राप्त किया! नन्द के आनन्द भयो,जय कन्हैयालाल की! गीत भजनों से पूरा कथा पण्डाल भगवान के जन्मोत्सव गीतों, सोहर गीतों से गुंजायमान हो गया !


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