चित्रकूट-मानिकपुर में बीएलओ ने रचा कीर्तिमान
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाने वाली मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की दिशा में जनपद चित्रकूट ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अपर जिलाधिकारी (वि/स) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी चन्द्र शेखर ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी उप्र लखनऊ के निर्देशानुसार नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रेपेन्सी श्रेणी के मतदाताओं पर जारी नोटिसों की सुनवाई नियमानुसार की जा रही है। इसी क्रम में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 236-चित्रकूट और 237-मानिकपुर में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेबिल अधिकारियों (बीएलओ) ने अपने-अपने आवंटित बूथों पर शत-प्रतिशत लॉजिकल डिस्क्रेपेन्सी निस्तारण का कार्य पूर्ण कर मिसाल पेश की है। विधानसभा 236-चित्रकूट में चार बीएलओ-
![]() |
| बीएलओ को सम्मानित करते एसडीएम मऊ |
हेमराज सिंह, विपिन शुक्ला, शत्रुघ्न प्रसाद एवं राम सजीवन-ने अपने बूथों पर त्रुटि सुधार का कार्य पूरी दक्षता से संपन्न किया। वहीं 237-मानिकपुर में दस बीएलओ, जिनमें सत्य प्रकाश, विपिन कुमार, क्षितिज कुमार, सूर्यकान्त सिंह, अजीत सिंह, अरुण कुमार सिंह, देशराज सिंह, जय प्रताप, हरिओम पाण्डेय और जयराम शामिल हैं, ने सौ प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। उप जिलाधिकारी कर्वी एवं मऊ ने उत्कृष्ट कार्य के लिए सभी बीएलओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की गारंटी है, बल्कि मतदाता विश्वास को भी सुदृढ़ करती है।
जलवायु की चेतावनी पर जागा अकबरपुर, पृथ्वी रक्षा यात्रा ने जगाई नई सोच 0 जलवायु परिवर्तन पर ग्रामीणों की हुंकार 0 प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े कदम चित्रकूट। जिले के कर्वी विकास खंड अंतर्गत अकबरपुर सचिवालय बुधवार को पर्यावरण चेतना का केंद्र बन गया, जब विकास पथ सेवा संस्थान की ओर से कृषि आधारित जलवायु परिवर्तन एवं पृथ्वी रक्षा यात्रा के तहत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एवं अतर्रा डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शंभू सिंह चंदेल ने की। मुख्य वक्ता डॉ प्रभाकर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज कृषि के सामने विकराल चुनौती बन चुका है और यदि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय रहते नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर संकट झेलेंगी। उन्होंने जल संरक्षण, जैविक खेती, फसल विविधीकरण और स्थानीय बीजों के संरक्षण को भविष्य की अनिवार्यता बताया। अध्यक्षता कर रहे शंभू सिंह चंदेल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी एक संस्था या सरकार का विषय नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक खेती अपनाकर गांव को पर्यावरण संरक्षण का मॉडल बनाने का आह्वान किया। संस्थान के कार्यकर्ता वंश गोपाल ने गोआधारित कृषि पद्धति, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और व्यवहारिक उपायों की विस्तार से जानकारी दी। डेढ़ वर्ष से चल रहे इस अभियान से सैकड़ों किसान लाभान्वित हो चुके हैं। अंत में डाबर इंडिया लिमिटेड के सहयोग से ग्रामीणों को फ्रूट जूस व उपयोगी सामग्री वितरित की गई तथा उपस्थित किसानों और युवाओं ने जल संरक्षण व सतत खेती अपनाने का संकल्प लिया।


No comments:
Post a Comment