कानपुर, प्रदीप शर्मा- छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के शिक्षा विभाग स्कूल ऑफ टीचर एजूकेशन में विश्वविद्यालय स्थापना दिवस सप्ताह के अंतर्गत शुक्रवार को पूर्व छात्र परिचर्चा विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा में उसका समायोजन’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि एवं पूर्व छात्र डॉ.आकाश वर्मा, सहायक आचार्य वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक नहीं बल्कि इसकी जड़े हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता से गहराई से जुड़ी हुई है और आज हमारे जीवन में इसकी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि
हमने एन ई पी 2020 के माध्यम से इस मृतप्राय होती परंपरा को नया जीवन देने की कोशिश की है, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम की अध्यक्षा डॉ.तनुजा भट्ट ने कार्यक्रम में भारत के नवनिर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की आवश्यकता के बारे में बताया व कार्यक्रम संयोजक डॉ. आर.पी. सैनी ने बताया कि भारतीय ज्ञान एवं सनातन ज्ञान से वर्तमान विद्यार्थी अपने लक्ष्य निर्धारण में सहायता ले सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. रश्मि गोरे, डॉ.स्नेह पांडे, डॉ. गोपाल सिंह, डॉ. प्रियंका मौर्या, डॉ. रत्नर्तुः मिश्रा, डॉ. बद्री नारायण मिश्रा, डॉ.कुलदीप सिंह चौहान तथा समस्त शोध अध्येता एवं विभाग के समस्त विद्यार्थी मौजूद रहे।


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