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Thursday, February 19, 2026

तकनीक का लाभ तभी जब वह सीधे किसान के खेत तक पहुंचे

कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की कार्यशाला आयोजित

बाँदा, के एस दुबे । कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय द्वारा 'एकीकृत बागवानी विकास मिशन' एमआईडीएच परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सुपारी एवं मसाला विकास निदेशलय डीएएसडी कालीकट द्वारा झाँसी के उद्यानिकी प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र बरुआ सागर में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य विषय "बुंदेलखंड में हल्दी, अदरक एवं बीजीय मसालों की उन्नत खेती" रहा। प्रशिक्षण में एक सैकड़ा से अधिक प्रगतिशील पुरुष एवं महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी की और आधुनिक खेती के गुर सीखने में खासा उत्साह दिखाया। मुख्य अतिथि एवं केंद्र प्रभारी डॉ. बीपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बुंदेलखंड की जलवायु औषधीय और मसाला फसलों के लिए वरदान है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि परंपरागत खेती के साथ यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से मसालों की खेती


अपनाएं, तो कम लागत और कम पानी में भी अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसी प्रकार से विशिष्ट अतिथि डॉ. निशि राय (प्रमुख, क़ृषि विज्ञान केंद्र) ने महिला किसानों की बढ़ती संख्या पर खुशी जाहिर की। मुख्य परियोजना अन्वेषक एवं अधिष्ठाता डॉ. सत्य व्रत द्विवेदी ने परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी, उन्होंने जोर दिया कि हल्दी और अदरक की खेती में वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान कंद सड़न जैसी बीमारियों से बच सकते हैं। सह-परियोजना अन्वेषक एवं अध्यक्ष क़ृषि प्रसार विभाग डॉ. भानु प्रकाश मिश्रा ने कहा कि तकनीक का लाभ तभी है जब वह सीधे किसान के खेत तक पहुँचे। प्रशिक्षण मे हल्दी, अदरक और बीजीय मसालों (धनिया, सौंफ आदि) की नई किस्मों और तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने की एक कड़ी है। कार्यक्रम में पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका यादव, डॉ. निर्वेष सिंह, डॉ. मनोज कुमार कुशवाहा ने भी जानकारियां दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीनारायण ने किया। अंत में कृषकों को हँसिया का वितरण किया गया।


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