इलाज के अभाव में एक युवक की फिर चली गई जान
पीड़ितों ने जिलाधिकारी से कार्यवाही करने की मांग
बांदा, के एस दुबे । सफेद पोशधारी डाक्टर लगातार अपने पेशे को कलंकित करते जा रहे हैं। अभी रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज में तैनात एक डाक्टर के द्वारा पांच वर्षीय मासूम बच्ची का गलत इलाज करने से उसको अपना पैर गंवाना पड़ा तो बीते दिवस एक युवक इलाज के अभाव में डाक्टरों की लापरवाही के कारण दम तोड़ दिया। पीड़ित परिजनों ने आज जिलाधिकारी की ड्योढी में गोहार लगाई और कहा कि मेडिकल कालेज में तैनात डाक्टरों की लापरवाही से होने वाली मौतों को रोक लीजिये, वर्ना कई घर वीरान हो जायेंगे। बांदा जनपद के ग्राम पडुई निवासी राजबहादुर पुत्र रामऔतार ने आज जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन देते हुये कहा कि उसका पुत्र रामजी साहू ने 15 अप्रैल को निशा डाई पी ली थी जिसको उपचार के लिये रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था,
दोपहर के समय भर्ती कराये मरीज को देर रात तक कोई डाक्टर देखने तक नहीं आया, वार्ड ब्वाय और नर्सेज उलट, पलट कर मरीज का इलाज करती रही। मरीज की हालत नाजुक देख हमने रिफर करने का आग्रह किया तो किसी भी तैनात जिम्मेदार मेडिकल प्रशासन ने हमारी एक न सुनी। जब हमने अपने एक रिश्तेदार को भाजपा नेता होने की बात कही तो यहां पर तैनात स्टाफ व डाक्टर ने कहा कि यहां के प्रिंसपल खुद भाजपा समर्थित है, कोई कुछ नहीं कर सकता है। किसी तरह से हमारे रिश्तेदार आईसीयू में 16 अप्रैल को जाकर देखा तो रामजी साहू मृत पड़ा था।मेडिकल कालेज के डाक्टरों और स्टाफ की लापरवाही से जान गंवा चुके रामजी साहू के परिजनों ने जिलाधिकारी से मांग करते हुये कहा कि मेडिकल कालेज में तैनात डाक्टरों और स्टाफ के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाये, जांच कराने के नाम पर यहां लम्बा कमीशनबाजी का खेल चलता है। जितेन्द्र राज ने मीडिया के सामने बताया कि रामजी की जांच करने के नाम पर लगभग 8 हजार रुपये ले लिये गये, क्या जांच हुई किसी को कुछ पता नहीं है। राजबहादुर ने कहा कि अभी कुछ समय से पहले ही रामजी का विवाह हुआ था, घर में उसकी पत्नी और मां का रो-रोककर बुरा हाल है।
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