फसल अवशेष न जलाने की प्रदेश सरकार की विशेष अपील
पराली जलाना अब पड़ेगा भारी, उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना
पर्यावरण की रक्षा और किसान की उन्नति ही सरकार की प्राथमिकता
बांदा, के एस दुबे । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश और समृद्ध किसान के विजन को धरातल पर उतारने के लिए बांदा जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति को प्राथमिकता देते हुए उप कृषि निदेशक ने जनपद के किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि पराली जलाना न केवल दंडनीय अपराध है बल्कि यह धरती की सेहत के लिए भी नुकसानदेह है।
उल्लंघन करने वालों पर हो सकती है कार्रवाई व जुर्माना
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाना राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के नियमों का सीधा उल्लंघन है। सरकार के अनुसार अब पराली जलाने पर भारी जुर्माना वसूला जाएगा जिसमें 2 एकड़ से कम भूमि पर 5000 रुपये, 2 से 5 एकड़ की भूमि पर 10000 रुपये
व 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 30000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं जिला प्रशासन ने सभी किसान भाइयों से पुरजोर अपील की है कि वे स्वयं पराली न जलाएं और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें। यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों की अनदेखी करता पाया गया तो उसके विरुद्ध तत्काल कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ किसान की उन्नति भी हो।
खेतों में पराली मिलाने से बढ़ेगी सोने जैसी चमक
बांदा के उप कृषि निदेशक डॉ अजय कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों और घास-फूस को जलाने के बजाय खेत की हार्वेस्टर से गहरी जुताई कर उन्हें मिट्टी में ही मिला दें। ऐसा करने से मिट्टी में कार्बनिक तत्वों और जो किसानों के मित्र कीट होते हैं व लाभकारी कृषि मित्र सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है। जिससे जमीन की उर्वरता प्राकृतिक रूप से बेहतर होती है। इन्होंने कहा कि इससे न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि खाद-उर्वरकों पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।


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