कुछ तकनीकी कमियां चिन्हित
शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले की धरती पर हर घर जल का सपना अब हकीकत की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन हकीकत के इस आईने में कुछ दरारें भी साफ दिख रही हैं। चांदी बंगर समूह ग्रामीण पेयजल योजना (जोन-37 एवं जोन-67) के ताजा स्थलीय निरीक्षण ने जहां एक ओर विकास की चमक दिखाई, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की सुस्ती और तकनीकी खामियों की परतें भी खोल दीं। बछरन और सिकरिया जोन में हजारों मीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है, सैकड़ों घरों तक नल कनेक्शन पहुंच चुके हैं और विशाल ओवरहेड टैंक खड़े हैं, लेकिन सवाल है कि जब ढांचा तैयार है, तो पानी क्यों नहीं बह रहा? ग्राम गोरा कोनी में 6-8 महीने से जलापूर्ति ठप रहना इस योजना पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। निरीक्षण में सामने आया कि ओएचटी में सीपेज, हाइड्रोलिक असंतुलन और निगरानी की कमी ने पूरे सिस्टम को कमजोर कर दिया है। सिकरिया और बक्टा बुजुर्ग जैसे गांवों में आंशिक
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| ग्रामीणों के सामने परियोजना का निरीक्षण करते अधिकारीगण |
आपूर्ति यह बताती है कि योजना की सफलता अभी अधूरी है। हैरानी की बात यह रही कि जरूरी रजिस्टर तक मौके पर मौजूद नहीं मिले, जिससे जवाबदेही पर भी सवाल उठे। हालांकि, सख्त तेवर में प्रशासन ने एलएंडटी, जल निगम और टीपीआई एजेंसी को फटकार लगाते हुए तत्काल मरम्मत, संतुलित जल वितरण और शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही यह योजना मॉडल सक्सेस स्टोरी बनेगी। अब देखना यह है कि कागजों का विकास जमीन पर पानी बनकर बहता है या फिर योजनाएं फाइलों में ही सूख जाती हैं। निरीक्षण में जूनियर इंजीनियर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) चित्रकूट अभिजीत यादव, एसएंडटी कंपनी के कन्सट्रक्शन मैनेजर विपिन पांडे तथा थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी (टीपीआई) के साइट इंचसर्ज अमर पांडे उपस्थित रहे।
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