मौके पर ही 4 और लोगों ने तोड़ा दम, 5 गंभीर
बांदा, के एस दुबे। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ बिसंडा थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार और ओवरलोड ट्रक ने कहर बरपाते हुए 6 लोगों की जान ले ली। इस भीषण हादसे के बाद पूरे कस्बे में हड़कंप मच गया है और मृतकों के परिजनों में कोहराम पसरा हुआ है। ट्रक ड्राइवर मौके से फरार होने में कामयाब रहा।मिली जानकारी के अनुसार, एक ट्रक बांदा से प्रतिबंधित लाल मोरंग (बालू) ओवरलोड करके जौनपुर की ओर जा रहा था। बिसंडा कस्बे के पास ट्रक ने सबसे पहले एक
साइकिल सवार रिटायर्ड शिक्षक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। शिक्षक की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने जब ट्रक का पीछा किया, तो पकड़े जाने के डर से ड्राइवर ने ट्रक की रफ्तार और बढ़ा दी। भागने के चक्कर में ट्रक ने सामने से आ रही एक सवारियों से भरी ई-रिक्शा को सीधी और जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। ई-रिक्शा को रौंदते हुए ट्रक पलटने के कारण चीख-पुकार मच गई। इस दूसरे हादसे में ई-रिक्शा सवार 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुल मिलाकर इस पूरे घटनाक्रम में 6 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें आनन-फानन में पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहाँ से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही बांदा के जिलाधिकारी अमित आसेरी और अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्य तेज करवाए। जिलाधिकारी ने सभी 6 शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और पीड़ित परिवारों को उचित विधिक कार्रवाई का भरोसा दिया है। बांदा पुलिस का दावा है कि फरार ट्रक ड्राइवर की तलाश में टीमें लगा दी गई हैं और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
आए दिन तेज रफ्तार और ओवरलोड ट्रक मासूमों की जिंदगी निगल रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हैं। जिन परिवारों ने अपने घर के मुखिया या अपनों को खोया है, वहाँ मातम पसरा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन पीड़ित परिवारों को क्या और कितना मुआवजा देकर उनके आंसू पोंछते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अगर ड्राइवर पहले हादसे के बाद रुक जाता या पुलिस की चेकिंग सख्त होती, तो वो भागने के चक्कर में ई-रिक्शा को न रौंदता और इतनी बड़ी संख्या में मासूमों की जान न जाती। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।



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