नियमों को ताक पर रखकर पानी के अंदर खनन,मर रहे जीव जंतु
बांदा, के एस दुबे । बांदा जिले की दुरेडी मुरम खदान में जहां नजर भर का फासला बाकी है वहां भारी भरकम मशीनों से नदी जल के अंदर चल रहे खनन में एक ओर जहां केन नदी का सीना छलनी कर माफियाओं ने पाताल खोद डाला है,वहीं जलीय जीव जंतुओं व नदी का जीवन नष्ट कर रही ये दैत्याकार मशीनो ने शहरी पेयजल के उस श्रोत को भी खत्म करने का ताना बाना बुन लिया है जिससे बांदा शहर की लाखों की आबादी की जीवन रेखा चलती है।अर्थात पीने के पानी का संकट मंडराने लगा है।देखा जाए तो अत्यधिक मुरम खनन के जरिए केवल अपनी तिजोरियां भरने की लिप्सा में व्यस्त खनन माफियाओं को रोकने वाला कोई नहीं है,और तो और उस प्रशासन को क्या कहें जिसे खनन अधिनियम और एनजीटी के नियमों के तहत पानी के अंदर या जल की तलहटी में किसी
प्रकार के खनन से रोक गया है।अगर मुरम खनन अधिनियम को नजदीक से देखा जाए तो नदी जलधारा से 6 मीटर दूर की मुरम खनन की अनुमति ही खनन अधिनियम देता है किंतु यहाँ तो खनन अधिनियम की ही ऐसी तैसी करते दिखाई देते है।
आपको बताते चलें कि केन नदी मुरम खदान में अवैध या अनैतिक खनन का मामला कोई नया नहीं है,मतलब जिस दिन से दुरेडी खदान में खनन कार्य शुरू हुआ है उसी दिन से नियमों को ताक पर रखकर अवैध व अनैतिक खनन की खबरें विभिन्न समाचारों के जरिए प्रशासन तक पहुंचती रही है किंतु न जाने ऐसी क्या बात रही कि प्रशासन ने दुरेडी खदान के अवैध खनन की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया इस संबंध में जब जिला खनिज अधिकारी या उनके स्टाफ से जानकारी करने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया तो न तो वह ऑफिस में उपलब्ध हो सके और न ही फोन उठाने की जहमत उठाई।


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